कुँवारी चूत की चुदाई

कुँवारी चूत की कहानी में मै अपने पहली chudai ki kahani बता रहा हु। मै जब 12 वि कक्षा में पड़ता था। तब मैंने मेरे साथ पढ़ने वाली लडकी को प्रपोज कीया था तो उसने हां बोला था मुझे। उसके बाद हमारा अफेयर चालू हो गया था।

मेरा नाम विशाल है। मै अभी 21 साल का हु। मै पटना का रहने वाला हूं। ये कहानी मेरे 18 साल की उमर की है। तब मैंने पहली बार कीसीको चोदा था।

12 वि कक्षा में मै बहुत हैंडसम दिखता था। मेरा कद तब मस्त 5.5 फीट का था। मै तब बहुत गोरा था। कॉलेज की सारी लड़कीयां मुझपर मारती थी। लेकीन मै कीसी और लड़की के मारता था। उसका नाम कविता था। आज उसी की chudai ki kahani आपको सुना रहा हु|

कविता मेरे कॉलेज की सुंदर लड़कीयों में से एक थी। कॉलेज के सारे लड़के उस पर लाइन मरते थे। लेकीन कविता बहुत ही सुशील लडकी थी। वो कीसी भी लड़के को भाव नहीं देती थी। वो पढ़ाई में भी काफी अच्छी थी।

chudai ki kahani
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एक बार मुझे उससे बात करने की बहुत ईच्छा हो रही थी। तो मैंने एक प्लान बनाया। वो कॉलेज के गार्डन में कीताबो में देख कर चल रही थी। मै जानबुचके उसे जाकर टकराया और सॉरी बोल दिया। लेकीन उसके आगे कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं हुई।

मुझे खुद पर बहुत गुस्सा आया था। एक दिन कॉलेज गार्डन में वो अकेली बैठी हुई थी। तो मैंने सोचा आज कुछ भी हो जाए। आज इसको प्रपोज कर ही दूंगा।

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मै बड़ी हिम्मत करके उसके पास गया और
मै : हेलो
कविता: हेलो.. क्या होना
मै : आपका दिल
कविता : तो तुम्हारी आज हिम्मत हुई। इतने दिन से में तुम्हे लाइन दे रही थी तब क्यूं नहीं बोला ऐसा।

तब मुझे लगा की यार ये भी मुझे पसन्द करती है।

हम दोनो का रिश्ता चल पड़ा। हम बहुत खुश रहने लगे। हम खुलकर बातें करने लगे। हम दोनो कॉलेज में छुप छुप कर मिलकर प्यार करने लगे। मै उसे अपने गले लगा लेता था। वो मुझे लिपट जाती थी। कॉलेज में मैंने उसे कई बार कीस कीया। उसने भी मुझे कई बार चुम्मा दिया।

एक बार चूमते चूमते मैंने उसके बूब्स दबा दिए। तो वो मुझसे दूर होकर मेरी तरफ देखने लगी। मैंने पूछा उससे क्या हुआ? वो कुछ नहीं बोली और वहा से चली गई। मुझे लगा की शायद उसे मेरी इस बात का बुरा लगा होगा।

मैंने उसको मैसेज कीया की क्या तुम्हे मेरा गुस्सा आ रहा है। तो उसने कहा की हाँ मुझे तुम्हारा गुस्सा आ रहा है। मैंने बोला क्यूं मैंने ऐसा क्या गलत कीया। तो वो बोली तुमने मेरे सीने पर हाथ क्यूं रखा। तो मैंने बोला तुम मेरी गर्ल फ्रेंड हो मेरा इतना तो हक्क बनता है ना।

मैंने पूछा उससे क्या तुम्हे कुछ अलग फिलिंग आयी थी। तो उसने बोला कौनसी अजीब फिलिंग। मैंने बोला क्या तुम्हे ऐसा लगा की मुझे तुम्हारे बूब्स नहीं दबाने चाहिए थे। तो उसने कुछ भी नहीं बोला। और ना वो गुस्सा थी।

अगले दिन हम कॉलेज में मिले, तब मै उससे दूर ही बैठा था तो उसने बोला। अब क्या तुम मुझसे गुस्सा हो क्या। मैंने बोला नहीं। तो वो बोली इतने दूर क्यूं बैठे हो। मैंने बोला अगर मैंने तुम्हे हाथ लगाया तो तुम गुस्सा हो जाती हो, इसीलिए मैं तुमसे दूर बैठा हूं।

वो गुस्से से खड़ी हुई, उसके साथ मै भी खड़ा हुआ। उसने मेरे लंड के थोड़ा ऊपर मेरा पैंट पकड़ के अपनी तरफ खींचा। और मेरे ओठाें को चूमने लगी। चूमते चूमते उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने बूब्स पर रख दिया। और मेरे हाथ पर हाथ रख कर खुदके बूब्स दबवा रही थी। तब मुझे बहुत मजा आ रहा था।

उसके बूब्स दबाते समय मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था। बहुत समय तक हम एक दूसरे को चूमते रहे। हम दोनो काफी समय तक एक दूसरे को प्यार बाट रहे थे। फिर मैंने भी उसका हाथ अपने लंड पर रखा लेकीन उसने अपना हाथ वापस खींच लिया वो बोली ये सब बादमें। मैंने बोला ठीक है।

कुछ दिन हमारा रिश्ता ऐसेही छुपते छुपाते चला। कुछ दिन बीत जाने के बाद मेरा उसके घर आना जाना चालू हुआ। सुरेखा के घर में उसके मम्मी और पापा ही रहते थे। उसको कोई भी भाई बहन नहीं थी। मै उनके घर पढ़ाई के बहाने से आया जाया करता था। हम उसके घर के हॉल में ही पढ़ाई करते थे।

कविता के मम्मी पापा भी मुझे पसन्द करने लगे थे। मतलब उनको हम दोनो पर कुछ भी शक नहीं था। हम दोनो के आंखो में घर के अन्दर प्यार करने की भावना जल रही थी। लेकीन उसकी मम्मी हमेशा ही घर में रहती थी। सेक्स करने की दोनो की इच्छा बहुत थी, लेकीन जगह ना मिलने के कारण हम बहुत तड़प रहे थे। और हम कीसी होटल में नहीं जाना चाहते थे क्योंकी हमारी उमर तब बहुत कम थी।

फिर हम सेक्स करने के कीसी मौके की तलाश करने लगे। जल्द ही हमे एक चोटासा मौका मिला।
उसके पापा ऑफिस गए थे। और उसकी मम्मी बाजार गई थी। तो उसका मुझे कॉल आया और बोली की जल्दी से आ जाओ घर पर कोई भी नहीं है। मै जल्दी से तैयार होकर उसके घर चला गया।

मै उसके घर गया। उसने दरवाजा लगाया। और हम कमरे में चले गए। ये ऐसा पहली बार हुआ था की अकेले कमरे में मै कविता के साथ था। मैंने पहले उसे जोर से गले लगाया। फिर उसे चूमना चालू कीया। चूमने के साथ मै उसके बूब्स भी दबा रहा था। हम करीब करीब आधे घण्टे तक एक दूसरे को चूमते हुए प्यार करते रहे।

फिर मैंने उसको बोला की क्या मै तुम्हारे कपड़े उतारू तो उसने ना हां बोला और ना ही ना बोला वो सिर्फ मुस्कुरा रही थी। फिर उसने अपनी मम्मी कहा तक आई है ये जानने के लिए मम्मी को कॉल कीया। तो मम्मी ने बोला की मैं थोड़ी देर में पहुंच रही हूं। मै अभी रास्ते में ही हु।

तो मुझे वहा से सेक्स करे बगैर ही निकालना पड़ा।
मै वहां से निकल गया हम दोनों ही उदास जैसे लग रहे थे। उसके 10 दिन बाद उसको पता चला की उसके कीसी रिश्तेदार की शादी है तो सबको 2 दिन के लिए शादी में जाना पड़ेगा। लेकीन कविता ने मना कर दिया। उसने बोला की उसके पेपर पास आ रहे है तो उसे पढ़ाई करनी है।

लेकीन उसकी मम्मी ने एक दूसरे रिश्तेदार की लड़की को उसके पास रुकने के लिए बुलाया था लेकीन वो लड़की सिर्फ रात में ही आने वाली थी। और पूरा दिन हमारा था। हम 10 दिन जल्दी से बीत जाने की रहा देखने लगे।

दस दिन बीत गए। उसके मम्मी पापा शादी में दूसरे शहर चले गए। कविता ने मुझे कॉल कीया। मै बहुत खुश हुआ। मेरा लंड यह सोच कर ही खड़ा हो गया था की आज कविता को चोदने का मौका मिलेगा।

मै घर से निकला। निकलते समय मुझे याद आया की कंडोम भी लें जाना चाहिए। लेकीन मुझे डर लग रहा था दुकान में जा के कंडोम मांगने का। क्यूं की ये मेरा पहली बार था। मैंने हिम्मत करके दुकानदार से कंडोम ले लिया।

जल्द ही मै उसके घर पहुंचा। वो मेरा इंतजार ही कर रही थी। मुझे अंदर लेने के बाद उसने दरवाजा लगा दिया। मै हॉल में ही बैठा था। उसने मेरे लिए पानी लाया। मैंने पानी पीते पीते उसे अपनी तरफ खींच लिया और अपने पास बैठा लिया।

फिर मै उसे चूमने लगा। वो भी मुझे चूमने लगी। हम दोनो के अंदर सेक्स करने की भावना उबल उबल कर बाहर आ रही थी। कुछ देर चूमने के और उसके बूब्स दबाने के बाद मुझसे रहा नहीं जा रहा था। तो मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया। और कमरे में ले जाकर बेड पर पटक दिया।

मैंने पिछली बार की तरफ इस बार ज्यादा समय गवाया नहीं। जल्दी से उसके कपड़े उतारना चालू कीया। कविता ने काले रंग की ब्रा और नीले रंग की चड्डी पहनी हुई थी। उसे आधी नंगी देख कर मेरी अंतर्वासना जागने लगी। मै उसे गापा गप चोदने की नजर से देखने लगा।

वो मेरी जांघ पर आकार बैठ गई। फिर मै उसकी चूचियां चूसने लगा। उसके मुंह से आह… आह… आवाज निकलने लगी। कविता मेरे कपड़े उतारने लगी और मै उसके चूचियां चूसता रहा।

अब मै नही रह पा रहा था। मैंने कविता की आंखो में देखा तो उसकी आंखो में भी वासना भरी हुई थी। फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। और उसकी चड्डी निकाल दी। उसकी बहुत ही गुलाबी कुवारी चूत थी। आज मै 21 साल का हो गया हूं फिर भी वो चिकनी चूत मुझे आज भी याद आती है।

मै इतनी चिकनी चूत देखके उस चूत पर फिसल गया और उसे चाटने लगा। कविता के मुंह से आह… आह…. आवाज निकल रही थी। उसकी आह…. आह…. आवाज सुनके मेरा सेक्स का कीड़ा और ज्यादा जाग रहा था।

कुछ देर बाद मैंने अपनी चड्डी निकाली। मेरे बड़े और जाड़े लंड को देख कर वो थोड़ी सी घबरा गई।
मैंने कंडोम का पैकेट निकला और अपने लंड पर पहन लिया। फिर अपना लंड उसकी चूत पर रख कर मै घिसता रहा उसकी आह… आह… आवाज निकलती जा रही थी।

फिर मैंने धीरे से उसकी चूत में लण्ड घुसाया। घुसते ही उसने अपने पैर सिमट लिए।मैंने उसके दोनो पैर दूर कीए और एक जोर का झटका लगाके उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। तब उसके मुंह से जोर की आवाज निकली तो मैंने उसे चूम लिया। और मै उसे चूमते चूमते ही कुछ देर चोदता रहा।

कुछ देर के दर्द के बाद कविता भी मेरा साथ देने लगी। फिर मै उसे जोर जोर से चोदता रहा वो आह…. आह… आवाज निकलती रही। कुछ देर की चुदाई के बाद हम दोनो साथ ही झड़ गए।

मैंने उसको इतनी अच्छी तरह से चोदकर सतुष्ट कीया इसीलिए वो बहुत खुश थी। और मैंने इतनी चिकनी चूत में लण्ड डाला इसीलिए मैं भी बहुत खुश था।

कुछ देर बाद मै घर चला गया। लेकीन उसको मुझसे चुदने की लत लग चुकी थी। इसीलिए उसने मुझे अगले दिन फिर से बुलाया। अगले दिन मैंने उसको अलग अलग स्टाइल में चोदा।

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