गांव कि कुंवारी चूत

सेक्स दुनिया पर आप सब पाठको का स्वागत है। आज कि कहानी में पढ़े कि, मै शहर में रहता हूं। मेरा खेत एक गांव में है। मै अपने गांव में अपने खेत को देखने के लिए गया था। तब मुझे गांव के कुंवारी लड़की की कुंवारी चूत चोदने का मौका मिला था।

पहले मैं अपने बारे में आप सभी को बता देता हु। मेरा नाम आशीष है। मै पुणे में रहता हूं। मेरी उमर 27 साल है। मेरा रंग सांवला है। और मेरा कद 5 फीट 8 इंच है। मैं दिखने में थोड़ा भारी हूं। क्योंकि मै हमेशा ही अपनी बॉडी को तंदरुस्त करने में मेहनत करता हु। अपने जिस्म को मैंने जिम कर करके बहुत मजबूत बनाया है।

जो कहानी मैं आपको बताने जा रहा हूं यह कहानी पांच महीने पहले की है। मै अपने गांव शोलापुर गया था। तब हमारे खेत में गन्ने की कटाई चल रही थी। मेरे दादा जी मेरे गांव में वैद्य हैं। जिनके पास सब दवा लेने आते हैं। हमारे खेत में हमने गन्ने काटने के लिये काम करने के लिए बहुत से लोगो को लगाया हुआ था। जिसमें से चार औरत थी और दो लड़कियां थी। उसमें से एक लड़की बहुत ही खूबसूरत थी।

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एक दिन की बात है कि उस लड़की को ज्यादा काम करने की वजह से सर में चक्कर सा आ गया। वो वहीं पर खेत में बेहोश हो गयी। यह देख कर मैं उसको अपनी गोद में उठा कर अपने घर ले आया और अपने दादा जी से उसको दवा देने के लिये कहा। अब तक वो लड़की बेहोशी की हालत में थी। मेरे दादा जी ने सबसे पहले पानी डाल कर उसको जगाया। फिर उससे पूछा कि उसको क्या परेशानी हुई थी। तो उसने बताया कि उसे शायद गर्मी की वजह से चक्कर आ गया।

तो दादा जी ने उसे एक जड़ी-बूटी दी जो पानी में पीस कर माथे पर लगानी थी। दादाजी ने कहा कि उससे उसका दर्द एक मिनट में बंद हो जायेगा। वह काम करने की हालत में नहीं थी। इसीलिए मैंने उसे अगले दिन सुबह आने के लिए कह दिया।

फिर वो अगली सुबह अपनी मां के साथ मेरे घर पर आयी। उसने सलवार सूट पहन रखा था। जिसमें वो हुस्न की मलिका शेरावत लग रही थी।

मैं आप सभी को बताना चाहूंगा कि गांव में लड़कियों को गर्मियों कि वजह से अंदर कुछ न पहनने की आदत होती है। village sex story in hindi.

जब मैंने उसे देखा तो मैं देखता ही रह गया। उसके बूब्स की चूचियां उसके कुर्ते से साफ साफ दिखायी दे रही थी। और कुर्ते में से बाहर आने को बेचैन हो रही थी। उसकी बूब्स के तनी हुई चूचियां देख कर मेरा लंड तो मेरे पैंट में ही खड़ा होना शुरू हो गया। मैंने पैंट में अंदर से ही अपने लंड को शांत किया। और वो खड़ा न दिखे इसके लिये मैंने लंड के ऊपर हाथ रख लिया।

मगर लड़की ने मेरी हालत को पहचान लिया। और मुझे ऐसी हालत में देख कर मुस्कुराने लगी। उसको मुस्कराती देख मैं भी उसकी तरफ देख कर मुस्कराया। और उसे आंखों ही आंखों में अन्तर्वासना का इशारा कर दिया। मगर उसने मुंह फेर लिया। मै घबरा गया। और घबरा कर मेरी गांड फट गयी कि ये कहीं किसी से कुछ कह न दे। मगर उसने किसी से कुछ नहीं कहा और कुछ दवाइयां लेकर वहा से वापस अपने घर चली गई।

उसको दोबारा चेक कराने के लिए 3 दिन बाद का टाइम दिया गया।

अब मैं उसी मौके की राह देखने लगा। मुझे पता था कि वो तीन दिन के बाद फिर से चेक कराने के लिए आयेगी। मैं इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था। मैं उसे चोदना चाहता था। मेरे मन में उसके लिए वासना बढ़ रही थी।

जब वो तीन दिन के बाद दोपहर को हमारे घर आयी तो मैंने उसके फीगर को बड़े ध्यान से देखा। उसका फिगर 36-32-36 था। उसके बूब्स और गांड ऐसी थी कि मैं उसे चोदने कि वासना आ जाये। उसकी माँ भी साथ में आयी थी। मैं वहीं छिप कर उसकी माँ की बात सुनने लगा।

उसकी माँ मेरे दादाजी से कह रही थी कि मेरी बेटी का सर दर्द अब आपकी दी हुई दवा की वजह से खत्म होने के कगार पर है। लेकिन अब इसकी योनि से पानी निकलने लगा है। मुझे लग रहा है कि मेरी बेटी अब जवान हो गई है।

दादा जी ने उसकी माँ को बताया कि जवान होने की वजह से इसकी योनि से पानी आ रहा है। मैं उन दोनों की बातें छिपकर सुन रहा था। मैंने मन ही मन सोच लिया था कि इस कमसिन जवानी की चुदाई सबसे पहले मैं ही करूंगा। इसकी चूत को खोल कर जवान मैं ही करूंगा। मगर सोच रहा था कि यह सब होगा कैसे। मेरा पास समय बहुत कम था।

तभी दादाजी ने बताया कि इसकी योनि की कोई हड्डी शायद गल कर इसकी योनि से बाहर निकल रही है। इसके लिए मैं एक आयुर्वेदिक तेल लिख देता हूँ। जिसकी मालिश इसके पूरे शरीर पर करनी पड़ेगी। उससे इसकी हड्डियां मजबूत हो जायेंगी। दादा जी ने दो और पुड़िया बना कर उसकी माँ को दे दी।

जब वो दोनों माँ-बेटी घर से बाहर निकल रही थीं, तो मैं गाड़ी लेकर बाहर जाने के लिए निकल रहा था। उसकी माँ ने मुझसे पूछा कि बेटा कहाँ जा रहे हो। मैंने उनको बताया कि मुझे शहर के मार्केट में जाना है। किस्मत से उनका घर भी रास्ते में पड़ता था। तो उसकी माँ ने मुझसे उनको कुछ दूर तक छोड़ने के लिए कहा।

जब हम उनके घर पहुंचे तो देखा कि उनका घर काफी छोटा था। उसकी माँ ने मुझे मार्केट से वह तेल लाने के लिए भी कह दिया।

मुझे अभी तक उस लड़की का नाम भी नहीं पता था। जब मैं तेल लेने गया तो मेरे दिमाग में उसको चोदने के खयाल आ रहा था। इसलिए मैंने पहले ही कंडोम का पैकेट भी ले लिया। जब मैं वापस आया तो उस समय रात के 8 बज चुके थे। और गांव में लगभग सभी लोग इस समय तक सो जाते हैं।

तेल देने के लिए मैंने उसके घर का दरवाजा खटखटाया, उसकी माँ ने नींद में दरवाजा खोला। मुझे अंदर बुला कर उन्होंने मुझे बैठने के लिए खुर्सी दे दी।

उसकी माँ  फर्श पर नीचे बैठ गई। तभी उसने अपनी बेटी को कविता कहकर पुकारा। तो उसका नाम कविता था। जैसा उसका नाम था वैसा ही उसका हुस्न था।

उन्होंने मेरी अच्छी खातिरदारी की। जब मैं जाने लगा तो उन्होंने मुझे घर पर रुकने के लिए कह दिया। रात काफी हो चुकी थी। मैं तो उनकी बात झट से मान गया। क्योंकि शायद इसी बात से मुझे कविता को चोदने का मौका मिलता। मैंने वहीं पर रात गुजारने के बारे में सोच लिया।

उनके घर में कविता का शराबी पिता भी था। उसकी माँ ने मुझे कविता वाले कमरे में सोने के लिये कह दिया। इतने में ही उसका बाप घर आया। वह कविता की माँ को पकड़ कर अंदर ले कर गया। दोनों आपस में लड़ाई करने लगे।

कविता मेरी बगल में बैठ कर आंसू बहाने लगी। कहने लगी कि उसके पिता रोज इसी तरह से घर पर शराब पीकर आते हैं। और फिर लड़ाई करते हैं। 

मैंने उसके आंसू पोंछे और उसके छू कराया। फिर उसने मेरे लिये खाना लगा दिया। जब तक मैंने खाना खत्म किया तो उसने मेरे लिये बिस्तर लगा दिया था। मै सोने के लिए जाने लगा तभी अचानक अंदर से उसकी माँ की मादक भरी आवाज आने लगी। हम दोनों ने जाकर छुपके से देखा तो उसका बाप उसकी माँ को चोद रहा था।

यह दृश्य देख कर मेरा लंड भी  खड़ा हो गया था। और मेरा हाथ कब मेरे लंड पर पहुंच गया मुझे पता ही नहीं चला। कविता यह सब देख रही थी। वह जब शरमाने लगी तो मैंने उसकी तरफ देखा। फिर अपनी तरफ देखा कि मैं अपने लंड पर हाथ रख कर उसको सहला रहा हूँ। मैंने अपना हाथ अपने लंड से हटा दिया। उसके बाद मैं अपने बिस्तर पर बैठ गया।

तभी कविता भी मेरे पास आ गई। फिर वो कहने लगी कि जो तेल आप लेकर आये हो उससे मेरी मालिश कर दोगे क्या? मेरे दादा जी ने इसी तेल से मालिश करने के लिए कहा था।

कविता के मुंह से यह बात सुनते ही मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई। मैंने जल्दी से हाँ कर दी।

उसके बाद कविता बाथरूम में जाकर हाथ-मुंह धो कर आ गई।

मैंने पूछा कि क्या सच में तुम मुझसे मालिश करवाने के लिये तैयार हो?

वो बोली हाँ, बिल्कुल तैयार हूँ।

मै समझ गया था कि इसको भी सेक्स कि भूख लगी है। मै अब उससे डरने वाला नहीं था।

तभी मैंने उसको अपने सारे कपड़े उतारने के लिए कहा। फिर उसको बेड पर लेटने के लिए कहा। बेड पर जाने के बाद मैंने मन भर कर उसके नंगे बदन को देखा। वो मेरे सामने चड्डी पर थी। उसकी चूचियां मुझे सेक्स का शैतान बना रही थी।

मैंने उसकी मालिश करना चालू किया। मालिश करते समय मै उसके बूब्स की भी मालिश करने लगा। तेल लगा कर मै उसके बूब्स को को रगड़ने लगा। उसके मुंह से सिसकारियां निकलनी चालू हो गई थी।

फिर मैंने उसकी चड्डी निकाल दी। और उसकी जांघों पर तेल लगा कर मालिश करने लगा। जांघो की मालिश करते करते मै उसकी चूत को भी रगड़ने लगा। उसकी कुंवारी चूत थी। इसलिए उसको हल्का सा दर्द हो रहा था।

उसकी खुली चूत को देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा था। फिर मैंने कुछ ना बोलते हुए उसकी चूत को चाटना चालू किया। इस बात पर उसने मुझे कुछ भी नहीं बोला। मै समझ गया था कि अब इसको चुदाई चाहिए।

मै उसकी चूत बहुत अच्छे से चाट रहा था। उसकी आवाजे चालू हो गई थी। फिर मैंने अपने कपड़े उतार दिए। और अपने लंड पर कंडोम लगा लिया। उसकी आंखे बंद थी। मैंने उसको आंखे खोलने के लिए कहा। उसने मेरा लंड देखते ही अपनी आंखे फिर से बंद कर दी।

फिर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ना चालू किया। और धीरे से अंदर डाल दिया। तब उसकी चीख निकलने लगी। मुझे लगा कि शायद इसकी आवाज इसके माता पिता को चली ना जाए। इसलिए मैंने अपना लंड अंदर डालते ही उसको किस करना चालू किया। उसने मेरे होटों को कस कर पकड़ लिया था।

फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। तब उसकी चूत से निकला खून मेरे लंड को लग गया था। फिर मैंने अपना लंड फिर से अंदर डाल दिया। और उसको किस करने लगा।

मै उसको धीरे धीरे चोदने लगा। उसको बहुत दर्द हो रहा था। वो अपने नाखूनों से मेरे पीट को खींच रही थी। 10 मिनट तक उसको बहुत दर्द होता रहा। फिर उसे थोड़ा मजा आने लगा।

फिर मैंने अपने चोदने कि रफ्तार थोड़ी बढ़ा दी। उसको थोड़ा और मजा आने लगा था। करीब करीब 25 मिनट कि चुदाई के बाद मै उसकी चूत में झड़ गया। और अपना लंड बाहर निकाल लिया। 

फिर मै उसके बड़े बूब्स से दूध पीने लगा। उसको वो बहुत अच्छा लग रहा था। उसका ये पहला सेक्स था इसलिए वो बहुत थक गई थी। मुझे भी गांव की कुंवारी चूत चोदकर बहुत मजा आया था। फिर हम दोनो एक ही बिस्तर पर सो गए।

ऐसी थी मेरी गांव के कुंवारे चूत की कहानी।

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