भाभी ने उसके बहन के लडकी की चुदाई मुझसे कराई।

भाभी सेक्स स्टोरीज में पढ़े कि मेरा चक्कर एक शादीशुदा भाभी से चल रहा था। उसका पति काम के सिलसिले में बाहर ही रहता था। भाभी की वासना को मिटाने काम मेरा ही था। 

एक बार भाभी की बहन कि लड़की मतलब भाभी की भतीजी उसके घर एक महीने के लिए आई थी। तब उसने हम दोनो को सेक्स करते हुए देख लिया था। फिर भाभी ने मुझे उसको भी चोदने के लिए बोल दिया। मैंने उन दोनो को अच्छे से संतुष्ट किया।

भाभी का नाम सुनीता है। भाभी बहुत ही हॉट थी। उसके बदन पर सोने वालो को मुलायम गद्दी का एहसास होगा। उनका फिगर 40-42-42 है। उसको देख कर किसी भी आदमी का लंड खड़ा हो जाए। 

भाभी की भतीजी का नाम अस्मिता था। वो बहुत ही खूबसूरत लड़की थी। जवानी उसके पूरे बदन से झलक रही थी। उसका फिगर 38-26-36 था। आप इस फिगर से अंदाजा लगा ही सकते है कि वो कितनी खूबसूरत होगी।

सुनीता भाभी की बहन की बेटी से मेरी मुलाकात सिर्फ एक इत्तेफाक सी थी। लेकिन इसके पीछे उस औरत का सबसे बड़ा प्लान था जो काफी सोच समझ कर बनाया गया था।

उस लड़की का नाम अस्मिता था। जो मूल रूप से विजयवाड़ा में रहती थी। गर्मियों की छुट्टी में वो अपनी मौसी सुनीता के यहाँ एक महीने के लिए रहने के लिये आयी थी। जैसा कि आप लोग जानते हैं कि औरतें एक बार किसी को अपना बना लें तो वो उस व्यक्ति को अपना सब कुछ देने के लिए तैयार हो जाती हैं।

भाभी के पति एक बिजनेसमैन है। इसलिए वो जादातर बाहर देश में ही रहते है। इसलिए भाभी इस हवेली जैसी कोठी में अधिकतर अकेली ही रहती थी। अस्मिता के आ जाने से उनकी चुदायी में मानो रुकावट सी आ गयी थी।

फिर सुनीता भाभी ने मुझसे कहा कि अस्मिता का मन मूवी देखने का है। क्या तुम हमारे साथ मूवी देखने चलोगे? मैं भला जवान लड़की के साथ घूमने का मौका कैसे छोड़ सकता हूं।

उसी लालच में मैंने बिना सोचे समझे ही हां कर दी। मुझे नहीं पता था कि इसका परिणाम क्या होने वाला है

मैंने ऑनलाइन कॉर्नर की एक सीट छोड़ कर बाकी ३ सीटें बुक कर लीं। मैं पिक्चर शुरू होने से २ घंटे पहले ही उनके घर पहुँच गया। मैंने सोचा कि अगर मुझे मौका मिला तो मै भाभी को भी चोद सकूंगा।

जैसे ही मैंने दरवाजे कि घंटी बजाई तो अस्मिता ने ही दरवाजा खोला जिसे देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया। अस्मिता दिखने में बिल्कुल 20-21 साल की ऐश्वर्या रॉय  जैसी दिख रही थी। जिसका चेहरा बिपाशा बासु  जैसा था। और उसके बूब्स के चूचे मानो उछल कर बाहर को आने को बेताब हों रहे थे। जिस्म जवानी से  भरा हुआ था। जिसे देख कर मेरा लंड मानो पैंट में ही हड़ताल करने लगा। और बाहर आने को तड़फने लगा।

मैंने अपनी पैंट में से लंड को हाथ लगा कर शांत किया। और फिर हल्की सी स्माइल के साथ उसको अपना परिचय दिया। उसकी आंखों की चमक देखते ही बन रही थी। उसके होंठ भी मानो सूखने से लगे थे।

मैंने उसको बोला कि मुझे अंदर नहीं बुलाओगी क्या। उसने फिर हाथ से मुझे अंदर आने का इशारा कर दिया। और बोली जी अंदर आइए ना।

मैं बोला कि तुमको मूवी देखने जाना था न? तुम्हारी मौसी कह रही थी। अस्मिता बोली हाँ मुझे यहाँ आये हुए आठ दिन हो गये और मौसी को घर का काम रहता है। जिसकी वजह से मै यहां आने के बाद अब तक कहीं भी बाहर घूमने के लिए जा ही नहीं सकी हु। इसलिए मैंने मौसी को बोल दिया था। 

मैंने बोला कोई बात नहीं, मैं तुम्हारी मौसी का दोस्त हूँ। तुमको जब भी कहीं बाहर जाना हो तुम मुझे बोल देना मै तुम्हे घुमा लाऊंगा। और तुम मेरे साथ बाहर कहीं भी घूमने के लिए चल सकती हो। तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी। अस्मिता बोली ठीक है। और बोली कि मुझे अभी नहाना है और मैं अभी तैयार होकर आ जाती हूं।

मुझे तो कोई मौका छोड़ना ही नहीं था। मैंने वहीं पर तीर छोड़ दिया। मैंने बोला तुम्हें तैयार होने की क्या जरूरत है? तुम तो वैसे ही इतनी खूबसूरत लग रही हो। आपको तो पता ही है कि अगर लड़की की तारीफ कर लो तो आप के साथ खुश रहती है।

मेरी बात सुन कर जैसे उसकी जवानी और निखर आई। वो अंदर ही अंदर अपने हुस्न को लेकर फूली नहीं समा रही होगी। उसकी आखों में ये झलक रहा था। फिर वो मंद मंद मुस्काती हुई अंदर चली गई।

तभी उसके जाने के बाद सुनीता भाभी आयी। जिसने मुझे तन और मन से अपना पति माना हुआ था। 

उसके आते ही मैं उस पर टूट पड़ा। मैंने उसको अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों से होंठों को सटा दिया। वो छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन मैंने उसके दोनों बूब्स को जोर से अपने हाथों में दबा दिया और फिर उसके चूचों के बीच में मुंह दे दिया। मेरी पकड़ इतनी तेज थी कि उसकी चीख निकल गई।

तभी अस्मिता के भागते हुए कदमों की आवाज आई तो हम दोनों अलग हो गये। अस्मिता आई और बोली क्या हुआ मौसी? सुनीता भाभी बोली की कुछ नहीं, वो कॉकरोज मेरे पैर के पास से गुजर गया तो मैं डर गई।

इतना सुन कर अस्मिता ने नीचे देखा। मगर वहा कॉकरोज होता तब दिखाई देती ना। फिर वो वापस से अंदर चली गई।

मैंने भाभी को बोला कि आपको चोदने का बहुत मन है आज, बहुत दिन हो गए है आपको चोदा नहीं। मैंने हवस भरे लहजे में कहा।

सुनीता भाभी बोली की ये जो मेरे घर में पहले का फल है इसे तो बाहर निकालूं! उनका इशारा अस्मिता की तरफ था।

मैंने कहा इसमें मेरि क्या गलती है। तुमने ही तो बुलाया है। भाभी बोली हाँ, मगर वो घर में रहते समय हम कुछ नहीं कर सकते। मैंने कहा कि वो अब नहाने गई है। हम अपना सेक्स जल्दी से निपटा लेते है। वो बोली नहीं।

मैं बनावटी गुस्से में बोला कि लेकिन मुझे इस सामने वाले फूल को एक बार प्यार तो करने दो। इतना कह कर मैंने भाभी की सलवार में से ही उसकी चूत को पकड़ कर जोर से ऊपर की ओर खींच दिया।

भाभी ने मुझे अपनी चीख रोकने के लिए किस किया और फिर हम दोनो ने एक दूसरे को चूमना चालू किया। फिर मै भाभी की गर्दन को चूमने लगा। तब भाभी की वासना जागने लगी थी। वो भी मेरे साथ किसी कि परवा किए बगैर सेक्स करना चाहती थी।

फिर मैंने भाभी की साड़ी उतारी। हमारे पास समय बहुत कम था। इसीलिए मैंने भाभी को सिर्फ ब्रा और चड्डी पर  कर दिया। भाभी ने भी सीधी मेरी पैंट उतारी। और अपने घुटनो के बल बैठ गई। और मेरी चड्डी नीचे कर के मेरा लंड चूसने लगी।

वो मेरा लंड चूसने लगी तभी उसकी भतीजी कौनसे कपड़े पहनूं ये पूछने के लिए बाहर आई। तो उसने हम दोनो को गलत हालत में देख लिया। तब भाभी ने समय ना गंवाते हुए उसके अपनी तरफ बुलाया।

भाभी उसको बोली कि क्या तुम इसके लंड से मजा लेना चाहोगी। तो अस्मिता बोली कि मौसी आप ये क्या बोल रही हो। तो भाभी बोली की मै बहुत अच्छा संतुष्ट करता हु। भाभी ने अस्मिता को बहुत फोर्स किया। फिर अस्मिता मान गई।

फिर अस्मिता और भाभी दोनो ही मेरा लंड चूसने लगे। दोनो कि लंड चुसाई मुझे बहुत मजा आ रहा था। कभी भाभी मेरे आंड को चूसती थी तो अस्मिता मेरे लंड को। फिर अस्मिता ने मेरा शर्ट उतारा। और मुझे किस करने लगी। फिर मैंने अस्मिता को भी नंगा कर दिया।

फिर मैंने भाभी की चड्डी निकाली। और भाभी को मेरे ऊपर बैठा लिया।फिर भाभी ने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत में डाल दिया। और जोर जोर से कूदने लगी। और मेरी अस्मिता अपनी चूत ले कर मेरे मुंह के ऊपर बैठ गई। मै उसकी चूत चाटने लगा।

दोनो कि मादक भरी आवाजे जोर जोर से निकल रही थी। आह…आह….आह…आह….. अह्हह्ह…..

मुझे बहुत मजा आ रहा था। दोनो मेरे लंड की प्यासी थी। भाभी तो मुझे पहले भी पसंद थी ही। लेकिन अस्मिता भी जवान चूत होने की वजह से मुझे पसन्द आए रही थी। अब शायद मै रोज दोनो को चोद सकता था।

फिर अस्मिता ने भाभी  को बोला कि मौसी हमे भी संतुष्ट होने के थोड़ा मौका दे दो। फिर भाभी मेरे ऊपर से उतरी, फिर मैंने अस्मिता को पलंग पर लेटा दिया और उसकी चूत में अपना लंड डाल कर चोदने लगा। भाभी उसके मुंह पर अपनी चूत ले कर बैठ गई। और अस्मिता भाभी की चूत चाटने लगी। मै अस्मिता के बूब्स पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगा।

फिर भाभी की बारी फिर से आ गई तब मैंने अस्मिता को बेड पर लेटा दिया। भाभी डॉगी स्टाइल में अस्मिता की चूत चाटने लगी। और मैंने भाभी की डॉगी स्टाइल में ही गांड़ में अपना लंड डाल दिया। और मै भाभी की गांड़ जोर जोर से चोदने लगा।

करीब करीब 25 मि. कि चुदाई के बाद मै भाभी की गांड़ में झड़ गया। दोनो को मुझ से चुदकर मजा आया था। मुझे भी उन दोनो को चोदकर बहुत मजा आया था। फिर मै आराम करने लगा। और भाभी और अस्मिता तैयार होने चले गए। उनका होने के बाद हम तीनो मूवी देखने चले गए।

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