नए पड़ोसी के लड़की की चुदाई

सेक्स दुनिया पे ये कहानी शर्मा ने खुदके जिन्दगी में हुए किस्से पर भेजी है। उन्हाेंने इस कहानी में एक अंजान लड़की को अपने दुकान में ही चोदा था।

अब सुनिए ये कहानी शर्मा कि जुबानी। आशा करता हूं ये हकीकत से भरी कहानी आप सब हमारी कहानी पढ़ने वालों को अच्छी लगेगी।

मेरा नाम अविनाश है। मेरी एक मेरे घर के पास वाले मोहल्ले में कपड़ों की दुकान है। मेरी उमर 32 साल कि है। मेरी शादी हो चुकी है। मुझे 2 बच्चे भी है।

ये कहानी में मेरे दुकान की बहुत ज्याद अहमियत है। इसीलिए मै आपको मेरी दुकान कैसी है इस बारे में थोड़ा सा बताता हूं। मेरी दुकान बहुत ही बड़ी है लेकिन उसमें सामान बहुत ही कम है। तो मेरे दुकान में जगा बहुत खाली है। और मेरे दुकान के आगे थोडासा धूप या बारिश से बचने के लिए एक छोटीसी जगह बनी हुई है।

मेरे मोहल्ले में मेरे घर से 6 से 7 घर दूर एक लड़की रहने आई थी। मुझे वो बहुत पसंद आती थी लेकिन मै उसे जानता भी नहीं था। ना वो मुझे जानती थी। हम सिर्फ कभी कभी एक दूसरे को देखते थे। उसके ऊपर बोले तो हम एक दूसरे के लिए बिलकुल ही अंजान थे।

एक दिन वो मेरे दुकान पर अायी। मुझे आके बोली सुनिए जी मुझे कुछ ज्यादा सामान चाहिए सिर्फ मुझे जल्दी जल्दी दीजिए गा। मेरे मन में सामान बोलने के बाद अलग ही हरकत चालू हुई। सामान को सुनते ही मुझे मेरा लंड मांगा ऐसा हो लगा। लेकिन अपनी अन्तर्वासना को मन में ही दबाते हुए मैंने उसे उसको लगने वाला सामान दे दिया।

वो मेरे दुकान के सामने से रोज गुजरती थी। लेकिन मैंने उसे कभी भी गौर से देखा नहीं था। लेकिन एक दिन अचानक बारिश आई थी। वो पूरी भीग चुकी थी। तब मैंने उसका असली फिगर देखा था। उसके ड्रेस उसके बूब्स से पूरे चिपक चुके थे। उसका पेट अंदर दिख रहा था। गाड़ी पर उसकी गांड़ सेक्सी लग रही थी। दिखने में तो वो पहले से ही बहुत सुंदर थी। उसको भीगी हुई हालत में देखने के बाद मेरा लंड खड़ा होके मुझे चीख चीख के बोल रहा था कि इसको चोद दे।

उस समय मैंने मेरे लंड को शांत कर लिया। लेकिन मेरे मन में उसे चोदने कि बात चालू ही थी।

कुछ महीने बाद बारिश का मौसम चालू हो गया। वो मेरे दुकान के सामने से भीगी हालत में रोज गुजरती थी। तब रोज मेरा लंड खड़ा होके मुझे बहुत परेशान करता था तो मै बाथरूम में जाकर लंड को जोर जोर से हिलाके मूठ मारता था ऐसा मेरा 1 महीने तक चला।

कुछ दिन बाद बारिश चालू होते हुए वो मेरे दुकान के सामने से गुजरते हुई मेरे दुकान के आगे ही गाड़ी लेके फिसल गई। मै दौड़ के उसे उठाने के लिए जोर से भागा, और मैंने पहले उसे उठाया और फिर मैंने उसकी गाड़ी उठा के बाजूमे लगा दी और उसे मेरी दुकान में लेके गया।

उसके कपड़े पूरे भीगने के साथ साथ कीचड़ में गंदे भी हो गए थे। मैंने उसे अपने दुकान के नए कपड़े पहनने के लिए दिये। मेरे दुकान में कपड़े बदलने की जगह नहीं थी तो मैंने एक बड़ा कपड़ा दीवार पर लगाया और उसे उस कपड़े के पीछे कपड़े बदलने के लिए भेज दिया। वो कपड़े बदल ने के लिए उस कपड़े के पीछे चली गई।

मुझे पता नहीं था कि वो कपड़ा थोड़ा पतला है। उसने जब कपड़े उतारना चालू किया तो मेरी नजर उसकी तरफ गई। उस कपड़े में से उसकी परछाई दिख रही थी। उस परछाई में वो जैसे जैसे कपड़े उतार रही थी तब मुझे उसके असली फिगर के बारे में समझ आ रहा था।

पहले उसने अपना ऊपर का कुर्ता निकला। फिर उसने अपनी ब्रा निकली। तब उस परछाई में मैंने उसके बूब्स पहली बार देखे। वो काफी बड़े थे। ऐसा लग रहा था कि अभी जाके उसका दूध पी लूं।
उसके बूब्स को देख के मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर उसने मेरा दिया हुआ कुर्ता बिना ब्रा पहने ही पहन लिया।

फिर उसने अपनी पैंट निकली। फिर उसके कमर के नीचे का फिगर देखके मेरा लंड उछल उछल के बाहर निकल ने कि कोशिश कर रहा था। तब मैंने अपने लंड पर हाथ रख कर उसे शांत करने की कोशिश कर रहा था।

फिर उसने अपनी चड्डी निकाली। तब मेरे लंड को संभालना मेरे बस में भी नहीं रहा। फिर उसने मेरी दी हुई पैंट पहन ली।

कपड़े बदल ने के बाद वो उस कपड़े के पीछे से बाहर आई। मैंने दिए हुए कपड़े में वो बहुत ही हॉट लग रही थी। लेकिन उसकी नंगी परछाई देखने के बाद मै उसे बिना कपड़ो के देखना चाहता था।

उसने अपने गीले कपड़े बाहर लाए और मुझसे एक थैली मांगी। मैंने उसे वो गीले कपड़े रखने के लिए थैली दी। वो उस थैली में गीले कपड़े रखने ही वाली थी तब उसके हाथ से गलती से उसकी ब्रा नीचे गिर गई। वो ब्रा का साइज बहुत बड़ा था। तब मेरे मन को ऐसा लगा कि जिसकी ब्रा इतनी बड़ी है उसके बूब्स कितने बड़े और रसीले होंगे।

मेरे मन से उसको चोदने कि बात जा ही नहीं रही थी। बारिश चल रही थी। तो मैंने उसे अपनी दुकान में बैठने के लिए एक खुर्ची दी। वो खुर्ची पर मेरे साथ बैठ गई। फिर हमने पहली बार बातें करना चालू किया।

तब मुझे पता चला कि वो शादीशुदा है लेकिन उसका उसके पति के साथ तलाक हो चुका है।
उसने अपने पति को खुद ही छोड़ा था। मैंने उसको पूछा कि आपने अपने पति को क्यों छोड़ा तो उसने बताया कि उसका पति नामर्द था। वो मुझे सेक्स का सुख नहीं दे पाता था इसीलिए मैंने उसे छोड़ा।

तब मुझे पता चला कि इसे सेक्स कि कितनी ज़रूरत है। उसकी ये बात सुन कर मेरी अंतर्वासना जागने लगी। कुछ बाते होने के बाद उसने मेरे बारे में पूछना चालू किया। उसने मुझे मेरी जाति जिंदगी के बरेमे पूछना चालू किया तब मुझे थोडा लगा कि वो भी मुझसे खुदको चुदवाना चाहती है।

बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। दोपहर का समय जल्दी ही श्याम होने पर आ गया। तब उसने बोला कि मैं भीग के ही घर चली जाती हु। लेकिन मुझे तो उसे चोदने का मन था। तो मैंने उसे कहा कि आप थोड़ी देर और रुक जाहिए बारिश रुक जायेगी। तो वो मेरी बात मान कर रुक गई।

मै पानी पीने के लिए खड़ा हुआ तभी एक जोर कि बिजली कड़की। वो डर गई और उठकर मुझको लिपट गई। मेरे अंदर वासना जाग गई। मैंने भी उसे कसकर पकड़ लिया। कुछ देर पकड़ ने के बाद वो मुझसे दूर जाने लगी। तब मैंने उसका हाथ पकड़ा लेकिन उसने मुझे कुछ नहीं बोला।

तो मैंने उसे हाथ पकड़ के ही अपनी बाहों में खींच लिया। तब मै समझ गया कि उसे भी मुझसे खुदको चुदवाने में मज्जा आयेगा। तो हम दोनो लिपटे हुए थे। मैंने उसे चूमना चालू किया। सिर्फ 5 मि. बाद ही वो भी मुझे अच्छी चूमने लगी।

फिर मै उसकी गर्दन को चूमने लगा। उसके अंदर अंतर्वासना जाग गई। उसको चूमते चूमते मै उसके बड़े बूब्स भी दबा रहा था। बूब्स दबाते ही वो गरम होने लगी। कुछ देर तक दबाने के बाद मैंने उसे थोड़ा दूर किया और 2 मि. रुकने को कहा।

फिर मैंने अपनी दुकान बंद कि। अब दुकान में सिर्फ हम दोनो थे। फिर मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और चूमना चालू किया। कुछ देर चूमने के बाद मैंने उसका कुर्ता निकला। उसने ब्रा पहले ही निकाल दी थी तो उसके बड़े बड़े बूब्स हवा में लटक ने लगे। वो ऊपर से नंगी हो गई थी।

फिर मैंने उसकी चूचियां चूसना चालू किया। उसके मुंह से आह… आह… आवाज निकलने लगी। उसकी चूचियां बहुत अच्छी लग रही थी। चूचियां चूसते समय मेरे हाथ सीधा उसके जांघों पर चले गए।

फिर मैंने उसके पैंट के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना चालू किया। तब वो पूरी गरम हो गई। उसकी आह… कि आवाज बढ़ने लगी। कुछ देर चूत को सहलाने के बाद मैंने उसकी पैंट निकाली।

उसने चड्डी भी पहले ही निकल ली थी तो उसकी बालो से भरी चूत मुझे चोदने को बुला रही थी।
उसके चूत पर काफी बाल थे। लेकिन मुझे पता था कि चूत कैसी भी हो चूत चूत होती है।

फिर मैंने नीचे कपड़ा डाला। उसको उसके ऊपर सुला दिया। फिर मैंने उसकी दोनों टांगो को बाजुमे किया। और उसकी चूत को चाटने लगा। तब वो आह…आह… अन्दर घुसो आह… आह… ऐसी आवाज निकालने लगी। वो मेरे बाल पकड़ कर अपनी चूत में मेरे मुंह को दबाते जा रही थी।

फिर मैंने अपने पूरे कपड़े निकले। मेरा नाचता हुआ लंड देख कर वो बहुत खुश हो गई। उसने मेरे लंड कि तारीफ भी की की कितना बड़ा है आपका लंड। वो बोली मेरे पति मुझे सुख नहीं दे सके तो क्या आप मुझे आपके इस बड़े लंड से पूरा सुख दे पाओगे। मैंने बोला उसको कि आज आपकी चुदाई होने के बाद आप मेरे पास खुदको चुदवाने के लिए रोज आओगी।

फिर मैंने अपना लंड उसकी गीली चूत पर लगाया और उसके ऊपर घिसना चालू किया। उसकी आह.. आह… कि तड़प से मै रुक नहीं पा रहा था।

फिर मैंने ज्यादा समय नए गंवाते हुए उसकी चूत में जोर से अपना लंड डाल दिया तब वो चीखने लगी मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया। और जोर जोर से धक्के मरने चालू किया कुछ देर बाद वो मेरी गांड को पकड़ के अपनी चूत में मेरा लंड अंदर तक घुसाने का प्रयास कर रही थी। तब मैंने उसके मुंह से अपना हाथ हटाकर उसके बूब्स को पकड़ कर जोर जोर से धक्के मारना चालू किया।

कुछ देर बाद मै उसके ऊपर गिर कर धक्के मरने लगा तब मेरे बदन को उसकी चूचीया घिस रही थी उसके कारण मै और जोर जोर से धक्के मरने लगा।मेरा लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करता रहा। और वो आह.. आह.. और जोर से … आह.. आह.. करती रही। करीब करीब 15 मि. कि धक्केबाजी के बाद हम दोनो साथ में ही झड़ गए।

फिर उसने अपने कपड़े पहन लिए मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए। तब तक बारिश भी रुक चुकी थी। मैंने अपनी दुकान खोली। वो मुझे बाय बोल कर अपने घर चली गई। मेरा उसे चोदने का ख्वाब पूरा हुआ।

वो अगले दिन फिर आई। लेकिन अगले दिन कि कहानी अगले भाग में। अगला भाग पढ़ने के लिए नीचे कॉमेंट करे..

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