मामा की लड़की की और उसकी सहेली की वासना

मेरा नाम साहिल है। आज मै अपने जिंदगी में हुए थ्रीसम कि कहानी बता रहा हु। उसमे मै मेरे मामा की लड़की और उसकी दोस्त है। दोनो कि अंतर्वासना जाग गई थी। तो मैंने दोनो को संतुष्ट किया।

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मै आपको मेरे बारे में थोड़ा बता देता हु। मेरा नाम साहिल है मेरी उमर 21 साल है। मै दिल्ली में रहता हूं। मेरा कद 5 फीट का है। मै कॉलेज के आखरी साल में पढ़ रहा हूं। मेरी पहले से ही एक गर्ल फ्रेंड हैं। 

अब मै आपको मेरे मामा की लड़की के बारे में बता देता हु। उसका नाम सुनीता है। वो रांची में रहती है। उसकी उमर 19 साल है। वो दिल्ली में मेरे साथ ही कॉलेज में पहले साल में पढ़ती है। वो याहा रूम करके रहती है। उसके साथ उसकी एक सहेली भी रहती है।

अब मै आपको उसकी सहेली के बारे में बता देता हु। उसकी सहेली का नाम कविता है। वो मेरे ही कॉलेज में दूसरे साल में पढ़ती है। उसकी उमर 20 साल है। उसका फिगर लाजवाब है। उसने 2 साल में 6 बॉय फ्रेंड्स को छोड़ा है। अब वो सिंगल है। और उसे सेक्स कि बहुत भूख है।

सुनीता की 12 वि होने के बाद  मेरे मामा ने उसे दिल्ली पढ़ने के लिए भेज दिया था। उसको मेरे ही कॉलेज में डाला था। उसके लिए मैंने ही रूम देखी थी। उसका फिगर इतना कुछ अच्छा नहीं है। लेकिन वो मुझे बहुत पसंद करती थी। लेकिन मेरी पहले से ही एक गर्ल फ्रेंड थी। इसीलिए मै उसे ज्यादा भाव नहीं देता था।

कुछ दिनों तक वो रूम में अकेली ही रही थी। कॉलेज में उसकी सीनियर कविता से उसकी पहचान हो गयी। फिर कुछ दिन बाद वो दोनो अच्छी सहेलियां बन गई थी। कविता भी अपने रूम पर अकेली रहती थी। कुछ दिनों बाद कविता सुनीता के साथ रहने आ गई थी। 

मै कविता को कई दिनों से चोदना चाहता था। बल्कि मै ही नहीं उसे तो पूरा कॉलेज चोदना चाहता था। उसे बड़े लंड वाले लड़के बहुत पसंद आते थे। उसने कई लडको से खुदको चुदवाकर उन्हें चोद दिया था। उसे सेक्स कि बहुत भूख थी। ये बात सारे कॉलेज को पता थी।

मैंने सुनीता को उसके साथ रहने से कई बार मना किया। लेकिन सुनीता मेरा कुछ भी नहीं  सुनती थी। कविता के साथ साथ सुनीता के मन भी सेक्स कि भूख बढने लगी थी। वो भी लडको को हवस की नजर से देखने लगी थी। 

मै समझ गया था कि अब सुनीता को किसी बड़े लंड की ज़रूरत लग रही है। लेकिन उसके फिगर की वजह से मेरे मन में उसको चोदने कि बात नहीं आ रही थी। लेकिन कविता को चोदना है इस बात से मुझे कविता कि याद आने लगी थी।

कुछ दिनों के बाद मैंने कविता से दोस्ती के लिए पूछा। उसने बिना कुछ सोचे समझे मुझे दोस्ती के लिए हां बोल दी। 

कविता सुनीता को सेक्स कैसे कैसे होता है, अंतर्वासना कैसे जागती है। अपनी चूत में ऊंगली कैसे डालना ये सब बाते बताती थी।

कुछ दिन बीत गए फिर मै, सुनीता और कविता के साथ में ही एक ही गाड़ी पर कॉलेज जाने लगे था। मै गाड़ी चलाता था। मेरे पीछे सुनीता बैठती थी, और उसके पीछे कविता बैठती थी।

सुनीता मुझे कंधे पर पकड़ती थी। और कविता सुनीता के पेट को पकड़ती थी। एक दिन सुनीता ने अपने हाथ मेरे कंधे पर से नीचे नीचे सरकाते हुए मेरी जांघो पर रख दिए। मेरा लंड खड़ा हो रहा था। मुझे मजा आ रहा था। मैंने उसे कहा क्यूं आज ज्यादा ही सेक्स चढ़ रहा है क्या। वो बोली तुम्हारे नाम से तो मै रोज ही अपनी चूत में उंगलियां डालती हूं। तुम तो मुझे देखते भी नहीं।

मैंने उसे बोला मै मेरी गर्ल फ्रेंड को धोका नहीं दे सकता। फिर उसने अकेले में ये बात कविता को बताई। कविता उसे बोली कि तुम चिंता मत करो मै उससे तुम्हारी सेटिंग करा देती हु।

अगले दिन गाड़ी पर कविता बीच में बैठ गई। उसकी चूचियां मेरे पीट पर रगड़ रही थी।मेरी उसे चोदने कि वासना जाग रही थी। फिर उसने भी मेरे कंधे पर हाथ रख दिया। फिर वो अपना हाथ मेरे पेट को छूते हुए नीचे लाई और मेरी जांघो पर रख दिया। तब मेरा लंड तो जैसे बाहर निकल ने के लिए तड़फ रहा था। उसने मुझे बोला कि साहिल कैसा लग रहा है। मैंने कहा मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम्हे अभी चोद दूं।

फिर उसने अपना हाथ मेरी जांघों से निकाल कर मेरे पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया। मेरे मुंह से कुछ भी आवाज नहीं निकल रही थी। वो बोली वाह…साहिल तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है। तुम तो अपनी गर्ल फ्रेंड को बहुत खुश रखते होंगे।

मैंने कहा नहीं मैंने तो अभी तक उसे छुआ भी नहीं है। वो बोली क्यों। मैंने कहा कि वो चाहती है कि मै उसे शादी के बाद ही छूऊ। वो बोली फिर क्या तुम्हारा किसीको चोदने का मन नहीं करता क्या। मैंने कहा करता तो है लेकिन मै अपनी गर्ल फ्रेंड को धोका नहीं देना चाहता।

वो बोली एक बार चोदने से धोका नहीं होता। सुनीता तुमसे चुदना चाहती है। मै  बोला नहीं मै शादी के बाद उसे ही चोदूंगा। फिर वो गाड़ी पर ही पैंट के ऊपर से ही मेरा लंड हिलाने लगी। कॉलेज आने तक वो मेरा लंड हिला रही थी।

मेरा लंड झड़ने ही वाला था तब कॉलेज आ गया था। उसने मेरे लंड को हिलाने अधूरा छोड़ दिया था। फिर मै कॉलेज के बाथरूम में गया और मूठ मारी। और मुझे बहुत सुकून मिला।

सुनीता मेरे लंड के लिए तड़फ रही थी। वो अपनी चूत में दिन में 5 बार उंगलियां डालती थी। वो अपनी परेशानी कविता को हमेशा बताती थी।

कविता बहुत ही चालाक लडकी थी। उसने सुनीता से कहा मै तुम्हे साहिल के लंड से चुदवा सकती हु, लेकिन मै भी साहिल के लंड से खुदको चुदवाना चाहूंगी। सुनीता मन गई। लेकिन सुनीता बोली कि पहले मै उसके लंड को अपने चूत में लूंगी। उन दोनो का खुदकी वासना मिटाने का प्लान बन गया।

वो रविवार का दिन था। दोपहर के 12 बज रहे थे। मै अपने मोबाइल में pubg खेल रहा था। तभी मुझे सुनीता का कॉल आया। वो बोली साहिल जल्दी से आजाओ कविता को चक्कर आ रहे है उसे दवाखाने में ले के जाना है।

मैंने तैयारी की और उनकी रूम की तरफ निकल गया। जैसे ही मै वहा पहुंचा, सुनीता ने दरवाजा खोला। मैंने देखा कविता चादर ओढ़े सोई थी। मै अंदर गया सुनीता ने दरवाजा बंद कर लिया।

मै कविता के पास गया और उसकी चादर निकाली। तो वो बिस्तर पर अपना खूबसूरत फिगर ले के कपड़े उतार के ब्रा और चड्डी पर सोई थी। मैंने कहा ये क्या है। तो वो बोली तुम मुझे चोदना चाहते थे न। आज तुम्हारी ख्वाहिश मै पूरी कर दूंगी।

मैंने पीछे पलट के देखा तो सुनीता ने भी अपने कपड़े उतार लिए थे। मैंने सुनीता से कहा अब तुम ये क्या कर रही हो। तो वो बोली मै तुम्हारे लंड को अपनी चूत में लेने की तैयारी कर रही हूं। मै डर गया था। और दीवार पर टेक गया।

दोनो लड़कियां मेरे पास आई और मेरे कपड़े उतारने लगी। कविता ने मेरी शर्ट उतारी। सुनीता मेरा पैंट उतार रही थी। मै डरा हुआ था।

जैसे ही मेरा शर्ट उतारा कविता मेरे ओठो को चूमने लगी। उसके ओंठ बहुत रसीले थे। सुनीता ने मेरी पैंट उतार के मेरी चड्डी भी उतारी। और मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया। मेरी अंतर्वासना जाग गई। फिर मै भी उन दोनो को चोदना चाहता था। अब मुझे मेरी गर्ल फ्रेंड का खयाल नहीं आ रहा था। अब मेरे मन सिर्फ इन दोनो को चोदने का खयाल आ रहा था। 

कविता मेरे छाती को चूमते चूमते नीचे गई। और दोनो मिलकर मेरे लंड को चूसने लगे। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरे मुंह से वाह…वाह..उह..आह..वाह… ऐसी आवाजे निकल रही थी। फिर वो दोनो मुझे पलंग पर ले के चले गए। वहा सुनीता मेरा लंड चूसना छोड़ नहीं रही थी। कविता सुनीता की चूत चाटने लगी।  ऐसा लग रहा था कि कोई देसी थ्रीसम  सिनेमा चल रहा है।

कविता सुनीता की चूत चाट रही थी और सुनीता मेरा लंड चूस रही थी। कुछ देर लंड चूसने के बाद मैंने उनको कहा, कोण पहले चुदना चाहता है। तो सुनीता बोली पहले मै चुदूंगी।

मैंने सुनीता को पलंग पर लेटा दिया। उसकी चूत कविता ने पहले ही गीली कर दी थी। मैंने सुनीता की चूत में आराम से लंड घुसा दिया। सुनीता के मुंह से जोर से चीख निकली। मैंने कविता से कहा इसकी चीख का कुछ करो।

फिर कविता अपनी चूत को ले कर उसके मुंह पर बैठ गई। फिर मै सुनीता को चोदता रहा और सुनीता कविता की चूत चाट रही थी। मै सुनीता को जोर जोर से झटके मारने लगा सुनीता भी अपनी चूत उठाकर मेरे लंड को   अंदर घुसा रही थी। 

कुछ देर कि धक्के बाजी के बाद सुनीता और मै उसकी चूत में झड़ गए। मेरा लंड मुरझा गया। फिर कविता ने समय बर्बाद ना करते हुए मेरे गीले लंड को अपने मुंह में ले लिया। कुछ देर तक वो मेरे लंड को चूसती रही। फिर मेरा लंड खड़ा हो गया।

लंड खड़ा होने के बाद मैंने कविता से पूछा तुम कैसे चुदना चाहती हो। वो बोली मै डॉगी स्टाइल में चुदना चाहती हूं। मैंने कहा ठीक है झुक जाओ। कविता सुनीता की चूत पर अपना मुंह रख कर झुक गई। उसकी गांड़ बड़ी मस्त लग रही थी। मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला। उसके मुंह से आवाज़ भी नहीं निकल रही थी क्योंकि उसकी चूत पहले ही चुद चुकी थी।

वो सुनीता की चूत को अच्छे से चाट रही थी।  सुनीता के मुंह से आह….अह्ह्ह..अह्ह्ह..ऐसी आवाजे निकल रही थी। मै कविता को जोर जोर से धक्के मार रहा था। उसकी मुलायम गांड़ मेरे जांघों पर टकरा रही थी। मेरे अंदर उसे जोर जोर से चोदने कि वासना जाग रही थी।  मै उसे अपनी पूरी ताकत से चोद रहा था उसे भी बहुत मजा आ रहा था। 20 मि कि ठुकाई के बाद कविता और मै झड़ गए। 

सुनीता बोली आज कि मेरी अन्तर्वासना तो तुमने मिटा दी। लेकिन हर रविवार को अब तुम मुझे और कविता को ऐसे ही चोदना। मैंने कहा अब तुम्हे मेरे लंड की आदत लग चुकी है, और मुझे भी तुम्हारे चूत की आदत लग चुकी है। अब जब भी मौका मिलेगा हम लोग  चुदाई करेंगे। 

फिर मैंने अपने कपड़े पहने। अगली बार उसकी एक और सहेली आई थी। मै थक चुका था फिर भी मैंने सब को संतुष्ट किया था। आगे जानने के लिए कॉमेंट करे।

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