दोस्त के चाचा के साथ gay सेक्स कि कहानी

Gay सेक्स स्टोरीज में पढ़े कि मै gay हु। मुझे लडको में ही मजा आता है। एक बार मै दोस्त के घर गया था। उसके चाचा को gay के साथ सेक्स करने में बहुत मजा आता था। वो मुझे पसंद करने लगे थे। फिर हम दोनो ने अच्छा सेक्स किया। Gay Sex With Friend Uncle

मेरा नाम शाहरुख है।  अब मेरी उमर 27 साल कि है। ये कहानी चार साल पहले की है। मेरा फिगर बहुत ही स्लिम है। मुझे लड़कियों जैसा स्लिम फिगर रखना बहुत पसंद है। मेरी गांड का छेद तब बहुत ही छोटा हुआ करता था। आज भी वो ज्यादा बड़ा नहीं है। तुम में से कोई भी मुझे चोदकर बहुत मजा ले सकता है।

उस वक्त मेरी उम्र 23 साल की थी, जब ये घटना मेरी साथ हुई, तब मै उसकी बड़ी बहन कि शादी के लिए कश्मीर गया था। मैंने सोचा कि कुछ समय पहाड़ों पर बिताना भी हो जायेगा। 

मेरे दोस्त के घर में तीन लोग थे। उसके पापा उसकी मम्मी और मेरा दोस्त. उसके पापा आर्मी में ऑफीसर रैंक पर हैं और उसकी मम्मी हाउस वाइफ हैं। उन दिनों दोस्त के सारे रिश्तेदार शादी के लिए आए थे। उसमे उनके चाचा भी आए थे। उनके चाचा का किराने का दुकान था। Gay Sex With Friend Uncle

मै उसके घर करीब शाम को पहुंचा था। मैं उनके परिवार के सारे रिश्तेदारों से मिला, मुझे बहुत ही अच्छा लगा। उसके चाचा का फिगर उनकी उम्र के हिसाब से बहुत ही अच्छा था। उनकी उम्र लगभग 48 साल के आस पास थी।

उसके परिवार के होने के बाद मैंने उसके चाचा से मैंने नमस्ते की और पैर छूने के लिए अपने आपको झुकाया ही था, पर उन्होंने मुझसे सीधे हाथ मिलाया और गले लगा लिया।

उसके बाद हम लोगों ने बैठ कर थोड़ी देर बातें की। फिर मेरा दोस्त मुझे मेरा कमरा दिखाने ऊपर ले गया। वो बहुत ही अच्छा कमरा था, एकदम होटल जैसा शानदार लग रहा था।

फिर रात में हम सबने साथ में ही खाना खाया। और अपने अपने कमरों में सोने चले गए। अगले दिन चाचा के परिवार के साथ घूमने का प्रोग्राम था। इसलिए मैंने सफ़र की थकान दूर करने के लिए थोड़ा आराम करना ठीक समझा।

सुबह हम लोग तैयार होकर गाड़ी से घूमने निकल गए। मेरा दोस्त गाड़ी चला रहा था और उसकी चाची साइड में बैठी थीं। मैं और उसके चाचा पीछे बैठे थे। वो मुझसे मेरे बारे में और मेरी फैमिली के बारे में बातचीत कर रहे थे।

तभी मैंने नोटिस किया कि वो मुझसे चिपक कर बैठे हुए थे और बातें करते करते किसी भी बहाने से मुझे छुने का प्रयास करते थे। कभी कभी वो बातो में मेरी जांघो पर हाथ रख देते थे।

पहले मुझे लगा कि ये सब ऐसे ही होगा। पर जब वे बार बार ऐसा करने लगे, तो मुझे थोड़ा अजीब सा लगा और मेरे मन में भी उनके बारे में सोच कर कुछ कुछ होने लगा।

 मैं पहले, अपनी तरफ से पहल नहीं करना चाहता था। क्योंकि शायद मैं ग़लत न हो सकता था। और बेकार में दोस्त के घर पर मेरी बदनामी हो जाती थी।

उस पूरे दिन वो मेरे आस-पास ही घूमते रहे। और किसी ना किसी बहाने से मुझे छुने का मौका ढूंढने लगे।

मैं भी अब तक समझ चुका था कि वो क्या चाहते हैं, इसलिए मैं उनको कोई रोक टोक भी नहीं कर रहा था। पर कोई पक्का सिग्नल भी नहीं मिल रहा था। मुझे इस बारे में पहले पूरी तरह सुनिच्छित करना था।

फिर जब मैं अकेला था, तब वो मेरे पास आए और मुझसे बोले कि तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या? मैंने हंस कर बोला कि नहीं अंकल।

तभी वो मज़ाक में बोले कि तो ब्वॉयफ्रेंड है क्या? मैंने भी हंस कर कह दिया कि अरे नहीं अंकल … वो भी नहीं है.

फिर वो मुझसे बोले कि तुम तो इतने स्मार्ट दिखते हो … फिर भी तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। मैंने कहा हां ऐसे ही अंकल … मैंने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं है। यह कह कर मैं हंस दिया।

फिर मैंने उनसे पूछा कि आपकी तो शादी से पहले बहुत सी लड़की यो के साथ रिलेशन रहा होंगा, आप भी अच्छे दिखते हो।

तो वो बोले कि हां थी … मगर शादी के बाद कोई भी नहीं रही … बस ब्वॉयफ्रेंड रहे।

मैंने पूछा सच में अंकल….. आपका बॉयफ्रेंड है। वो बोले हां… तुम्हारे भी रहे होंगे … ये मुझे भी पता है। मैंने पूछा कि आपको कैसे पता है?

तो वो बोले कि मैं सुबह से तुम्हारे आस – पास घूम रहा हूँ। और तुम्हें यहां-वहां छू रहा हूँ। पर तुम फिर भी कुछ नहीं कह रहे हो … इसका क्या मतलब है … बोलो? और वो बोले कि मुझे इन बातो का बहुत अनुभव है।

उनकी ये बात सुनकर पहले तो मैं थोड़ा चौक गया … फिर बोला कि बस ऐसे ही अंकल…. मैंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया।

फिर वो बोले कि देखो … मैं साफ़ बात करता हूँ, जब से मैंने तुम्हें देखा है, मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूँ। तुम्हें देख कर मेरे अंदर कुछ कुछ होने लगा है. Gay Sex With Friend Uncle

उनकी ऐसी बातें सुनकर मुझे थोड़ी शरम आ गई और मैं वहां से चला गया। फिर वो भी समझ गए कि मैं भी यही चाहता हूँ। कि उनके साथ सेक्स करू। उसी शाम को हम लोग घर आ गए। और खाना खा कर अपने अपने कमरे में चले गए।

मैं अपने बिस्तर पर लेटे लेटे अंकल के बारे में ही सोच ही रहा था कि तभी मेरे रूम के दरवाज़े पर खटखट की आवाज़ होने लगी। मैंने दरवाजा खोला, तो सामने अंकल खड़े थे। मैंने पूछा अंकल आप इस समय पर यहां कैसे?

तो वे बोले कि मुझे तुमसे बात करनी है।

इतना कह कर वो कमरे के अंदर आ गए और बोले कि देखो शाहरुख … तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो। और मैं ये भी जानता हूँ कि तुम्हे भी मै अच्छा लगता हूँ। फिर परेशानी क्या है? मैंने बोला कि अंकल परेशानी कुछ नहीं है, बस मैं थोड़ा शर्मीला हूँ। आप मेरे दोस्त के चाचा हो, तो थोड़ी हिचकिचाहट तो होगी ही ना।

वो बोले कि बस इतनी सी बात है मैं अभी तुम्हारी शर्म दूर कर देता हूँ। तुम ये बात मत सोचो कि मैं तुम्हारे दोस्त का चाचा हूँ, बल्कि तुम ये सोचो कि मैं तुम्हारा ब्वॉयफ्रेंड हूँ।

मै फिर भी शरमा रहा था। फिर  वो मेरे करीब आ गए। और मुझे कसकर गले से लगा लिया। मैं भी उनसे चिपक गया। उन्होंने मेरे मुँह को बड़े प्यार से ऊपर किया और मेरे होंठों पर किस कर दिया। फिर वो बोले कि तुम मुझे किस नहीं करोगे? फिर मैंने भी उनके होंठों पर किस कर दिया। हम दोनो एक दूसरे को बहुत अच्छे से चूमने लगे।

उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे। उनके हाथ मेरी गांड दबाने लगे। मुझे उनके हाथ का टच अच्छा लग रहा था।

फिर वो मुझसे बोले कि आखरी बार तुमने सेक्स कब किया था। मैंने बोला कि लगभग तीन महीने पहले और आपने? वो बोले कि छह महीने पहले। मैंने बोला फिर तो आपने बहुत इंतजार किया है।

हम दोनों काफ़ी देर तक एक दूसरे को चूमते  रहे। फिर वो मुझसे बोले कि तुम पीछे घूम जाओ।

मैं पीछे घूम गया। उन्होंने मेरा पैंट उतार दिया। और उन्होंने मेरी  गांड उनके सामने नंगी कर दी। फिर उन्होंने मुझे थोड़ा झुकने को कहा। मै झुक गया। और वो मेरी गांड खोल कर उसकी गंध लेने लगे। अपनी जीभ से हल्के हल्के चाटने लगे। उनकी इस हरकत से मुझे भी बड़ा आनंद आने लगा था। मेरे मुंह से हल्की सिसकारियां निकलने लगीं थीं। Gay Sex With Friend Uncle

इसके बाद उन्होंने मेरी पूरी गांड अपने हाथों से खोली। और मेरी गांड में अंदर तक जीभ डाल कर उसे चाटने जैसा लगे। गांड के काफी अंदर तक अंकल अपनी जीभ घुसाने लगे। मेरे मुँह से और ज़ोर से मादक सिसकारियां निकलने लगीं। मैं अपने हाथ से उनका मुंह अपनी गांड के अंदर घुसाने लगा।

अंकल खूब मज़े से मेरी गांड खा रहे थे. लगभग 10 मिनट तक गांड चाटने के बाद वो खड़े हुए और मुझे अपनी तरफ घुमा लिया। और मेरे होंठों को चूसने लगे। उनके होंठों से मुझे भी अपनी गांड का टेस्ट चखने का मौका मिला था।

फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी पैंट के अंदर डाल दिया। और अपने  लंड पर रखवा दिया। मैं तो कब से इसी समय का इंतज़ार कर रहा था। अंकल बोले कि मेरे लंड को भी अपने होंठों को छूने का मौका दो। मैंने कहा कि हां ज़रूर अंकल।

फिर मैंने उनकी पैंट निकाली। उनका लंड लण्ड मेरे मुंह के सामने आ गया। उनका लंड 5 इंच का था।  फिर मैंने उनके लंड को अपने होठों का रस चखना चालू किया। मै उनके लंड को बहुत अच्छे से चूसने लगा। मेरे मुंह में उनका पूरा लंड गीला होने लगा था।

फिर उन्होंने मेरा सर पकड़ा और अपने लंड को मेरे गले तक पहुंचाने लगे। मुझे ऐसा लग रहा था कि ये मेरा hardcore सेक्स हो रहा है। फिर वो बोले अब तुम खड़े हो जाओ और झुक जाओ। मै खड़े खड़े ही तुम्हे चोदूंगा। 

मै खड़ा हो गया और दीवार के सहारे से झुक गया। फिर उन्होंने कंडोम पहना। और मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया। और शुरवात से ही ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगे। मेरी आवाजे भी जोर से निकल रही थी। आह….आह…आह….

वो मुझे उसी हालत में 10 मिनट तक चोदते रहे। फिर उन्होंने मुझे पलंग पर चलने को बोला। फिर उन्होंने मुझे डॉगी स्टाइल में होने के लिए कहा। फिर मै डॉगी स्टाइल में हो गया। उन्होंने फिर से मेरी गांड में लंड डाला। और मुझे अपनी पूरी ताकत से चोदने लगे। 

चोदते चोदते वो मेरे गांड़ पर झापड़ भी मार रहे थे। मुझे उनका हार्डकोर सेक्स बहुत पसंद आ रहा था। करीब करीब 20 मिनट कि चुदाई के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि वो झड़ने वाले है। मैंने उनको बोला कि आप मेरे मुंह में लंड दे कर झड़ सकते हो।

फिर उन्होंने मेरे मुंह में अपना लंड दिया। और अपना सारा वीर्य मेरे मुंह में ही डाल दिया। फिर मै उनके लंड को चूसने लगा। उनको बहुत मजा आ रहा था। मुझे भी बहुत मजा आया था।

ऐसी थी मेरी दोस्त के पापा के साथ gay सेक्स कि कहानी। Gay Sex With Friend Uncle

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