मेरा पहला सेक्स

मेरी ट्यूशन क्लास में एक लड़की से मुझे प्यार हो गया। मैंने जब उसको प्रपोज किया तो उसने मुझे हा बोल दी। फिर मैंने उसके साथ मेरी जिंदगी का पहला सेक्स किया। मुझे बहुत मजा आया।

मेरा नाम राकेश है। मै जबलपुर का रहने वाला हु। मेरी उमर 20 साल है। मेरे लंड का साइज़ 6 इंच का है। और मै पढ़ाई में बहुत अच्छा हु। सभी लड़के लड़कियां मुझसे पढ़ाई के नोट्स ले कर जाते है।

मैंने पढ़ाई अच्छे से करने के लिए जबलपुर में एक ट्यूशन में शामिल हो गया। मेरा वहा पहला दिन था। और मुझे पता नही था कि मुझे कहां पर बैठना है।

मैं सबसे आगे वाली लाइन में जाकर बैठ गया। तब तक क्लास में कोई नहीं आया था। तो मैं अपने मोबाईल में देख रहा था, इतने में ही इस कहानी कि मेरी आगे होने वाली गर्लफ्रेंड ट्यूशन क्लास में आई।

करीब 5 फीट, रंग गोरा, पतली सी 32-28-30 का स्लिम फिगर। आते बराबर वो मुझपर चिल्लाने लगी। वो बोली हेल्लो मिस्टर, क्या तुम्हें पता नहीं कि ये लड़कियों की सीट हैं। तुम पीछे जाकर बैठ जाओ।

मैंने बोला ठीक है कोई बात नहीं, आप यहां बैठ जाओ। मैं वहां से उठकर पीछे जाकर बैठ गया।

क्लास शुरू होने से पहले सर ने उन्हें खड़ा किया जिनका ट्यूशन में पहला दिन था। aur meri first time sex stories shuru ho gayi.

सर ने आखरी में मेरे बारे में जानकारी दि। वो बोले कि यह लड़का जबलपुर के काफी नामी स्कूल से है और पढ़ाई में भी काफी अच्छा है।

तब क्लास के सभी बच्चे मेरी तरफ देख रहे थे।

वो लड़की जिसने मुझे डांटा था वो भी पीछे मुड़कर मुझे देख रही थी। मैंने भी उसकी तरफ़ देख कर हल्का सा मुस्कुराया, उसने भी मुझे प्यारी सी स्माइल दी।

बाद में मुझे उसका नाम पता चला उसका नाम शांति था। शक्ल सूरत से एकदम हीरोइन जैसी  लगती थी। पूरी ट्यूशन में वो सबसे सुंदर लड़की थी। उसपर सभी लड़के मरते थे। लेकिन वो किसीको भी भाव नहीं देती थी।

कुछ दिनों तक सब कुछ नॉर्मल ही चलता रहा। मै ट्यूशन जाता था। वो भी ट्यूशन आती थी। मै पढ़ाई में ध्यान देता था। वो भी पढ़ाई में ध्यान देती थी। कभी कभी वो मुझसे पढ़ाई के बारे में पूछती थी।

जब कोचिंग क्लास की छुट्टी होती है तब वहां गाड़ियों कि काफी गर्दी हो जाती है।

मैं कोचिंग पैदल ही जाता था।

उस दिन भी मै पैदल ही था। मैंने देखा कि एक लड़का जो कहीं बाहर का था, उसने एकदम से शांति के पास से अपनी गाड़ी को स्लीप किया और उसे टक्कर मार दी। शांती अपनी गाड़ी के साथ नीचे गिर गई।

जब मैंने ये सब देखा तो मैं भाग कर उसके पास गया। उसे वहां से उठाया, गाड़ी उठाई, उसके कपड़ों की धूल साफ करी।

मैं उसे बोला कि शांती तुम ठीक तो हो? तुम्हे ज्यादा चोट तो नहीं लगी?

शांती बोली हाँ मैं ठीक हूं, कुछ नहीं हुआ।

मै इधर उधर देख रहा था तो मैंने उसके हाथ में चोट देख ली। उसके हाथ से खून निकल रहा था। जब मैंने उसे बताया तो वो एकदम घबरा गई और रोने लगी।

मैंने उसे उसके कंधे पर हाथ रखकर चुप करवाया। मेरे पास पानी की बोतल थी, मैंने उसको पानी पिलाया। मैंने बोला तुम कहो तो तुम्हें घर तक छोड़ दूं। तुम्हारी हालत सही नहीं है और तुम गाड़ी भी नहीं चला पाओगी।

उसने हां कह दिया।

हम उसके घर पहुंच गए।

शांती बोली आज तो तुम्हें मेरी वजह से बहुत परेशानी हो गई होगी। मैंने बोला अरे! नहीं ऐसा कुछ नहीं है, मेरा घर यही बस 2 गली आगे है।

शांती बोली तुम तो मेरे घर के काफी पास रहते हो। कभी देखा नहीं तुम्हें यहां? मैंने कहा मै ज्यादा घर के बाहर नहीं निकलता हु। वो बोली वो छोड़ो अंदर चलो मेरे साथ।

गेट उसकी मम्मी ने खोला। उसकी मम्मी भी उसी की तरह एकदम गोरी माल थी।

मैंने बोला नमस्ते आंटी।

आंटी बोली नमस्ते बेटा, तुम कौन हो मैंने पहचाना नहीं तुम्हें?

मैंने बोला आंटी मै शांती के साथ ही ट्यूशन में पढ़ता हूं। आज इसको किसी ने टक्कर मार दी थी तो मैंने सोचा घर तक छोड़ देता हूं।

आंटी बोली शांती बेटा, क्या हुआ कही ज्यादा चोट तो नहीं लगी ना। शांती बोली नहीं मम्मी, बस हाथ पर थोड़ी लगी है और कुछ नहीं।

उसकी मम्मी ने उसके डेटॉल लगा दिया।

आंटी बोली बेटा कहां रहते हो तुम?

मैंने बोला आंटी बस यही 2 गली आगे घर है मेरा। आंटी बोली अच्छा हुआ बेटा जो तुम इसे यहां तक ले आए। नहीं तो आजकल कौन करता है इतनी मदद। बेटा तुम अब जब भी ट्यूशन  जाओ तब यहीं से चले जाया करो दोनों का साथ जाना हो जायेगा।

मैंने बोला जी आंटी, ठीक है।

उसके घर पर सिर्फ पानी पीकर मैं वापस आ गया। शांती मुझे गेट तक छोड़ने आयी थी। तब मैंने उससे उसका नंबर ले लिया कि कल जब आऊंगा तब पहले फोन कर दूंगा तुम तैयार रहना। वो बोली ठीक है।

उसके बाद अगले दिन जब मैं उसे लेने गया तब वह पीले रंग के सूट में क्या गजब ढा रही थी क्या बताऊं आपको। उसको देख कर मेरे मन में प्यार कि घंटी बजना चालू हुआ।

बस उस दिन के बाद से ही हम दोनों की कहानी चल पड़ी। हम लोग बहुत देर तक एक दूसरे से बातें करते करते साथ ट्यूशन जाते थे। और साथ में ही वामस आते थे। ना जाने कब प्यार हो गया मुझे पता ही नहीं चला।

बाते करते करते एक दिन सेक्स की बाते निकल गई।

शांती बोली तुम तो बातें भी काफी अच्छी करते हो। आज तक सच बताना कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया है? मै सोच में गिर गया।

उस टाइम तक में बिल्कुल वर्जिन था। मेरे लंड का टांका भी नही टूटा था। मैंने सोचा आज इसने ये क्या पूछ लिया। मैं काफी शर्मीला हूं शुरू से। मैंने बोला शांती मैंने आज तक किसी के साथ सेक्स नहीं किया। शांती बोली झूठ मत बोलो। मैंने बोला तुम्हारी कसम शांती

शांती बोली अच्छा चलो मान लिया। वो बोली फिर क्या तुमने आजतक एक भी लडकी नहीं पटाई। 

मैने बोला इसबारे में मै तुमसे कुछ कहना चाहता हूं। वो बोली हां बोलो ना?

मैंने बोला शांति, मैं तुम्हें प्यार करने लगा हूं।

शांती बोली अच्छा जी बताओ कब से करते हो तुम मुझसे प्यार? मैंने बोला  जब तुमने ट्यूशन में मुझे पीछे पलटकर देखा था उस दिन से मै तुमसे प्यार करता हूं। शांती बोली काफी देर हो चुकी है। मैंने बोला क्या मतलब?

शांती बोली काफी टाइम लगा दिया तुमने मुझे ये कहने में! मैं तो तुमको उसी दिन से पसंद करती हूं जब तुमने मेरी मदद की थी।

मैंने बोला कि तुम किसी लड़के को भाव नहीं देती थी तो मुझे लगा कि तुम मुझसे दोस्ती तोड़ दोगी इसीलिए मैंने तुमसे इस बारे में बात नहीं कि थी। और तुमने  भी तो मुझे कभी नहीं बताया था कि तुम मुझसे प्यार करती हो।

उसके बाद अगले दिन हम गार्डन में मिले। वहां पर दिन के समय में कोई नहीं था तो मैंने मौका देख कर उसके गाल पर पप्पी दे दि।

उसने भी एकदम पलट कर जवाब दिया वह भी मुझे पागलों की तरह होठों पर चूमने लगी।

मैंने भी मौका देख कर उसके बूब्स दबाना शुरू कर दिया। वो मेरा खड़ा लंड पैन्ट के ऊपर से ही मसलने लगी। उसके बाद उसने मुझे रोक दिया और बोला प्लीज, यहां नहीं … कोई देख लेगा। मैंने उसकी बात मान ली। 

उसके बाद गार्डन में चुम्मा चाटी का काम रोज का हो गया।

अब मुझे इसके आगे बढ़ना था तो मैंने उसे बताया कि मुझे मेरा पहला सेक्स तुम्हारे साथ करना है. कुछ करो ना!

उसने कहा ठीक है, कुछ दिन रुको, फिर देखते हैं। मैंने कहा कितने दिन रुकना पड़ेगा। वो बोली जैसे ही हम दोनो में से किसी का घर खाली होगा वैसे ही हम सेक्स करेंगे।

दो दिन बाद शांती का रात को मैसेज आया कि मेरी नानी की तबीयत खराब है तो मम्मी पापा गांव जा रहे हैं। और मैंने ट्यूशन का बहाना बना लिया है। इसीलिए मै नही जा रही हूं। अब हमारे पास पूरा दिन है सेक्स करने के लिए। और यह मेरा भी पहला सेक्स है, मैं भी इसे एन्जॉय करना चाहती हूं। कल तुम ट्यूशन की जगह मेरे घर पर ही आ जाना। और उसने बोला कि याद से कंडोम ले कर आना।

रात भर बस यही सोचता रहा पहले सेक्स के बारे में … तो बहुत देर तक मुझे नींद नहीं आयी।

अगले दिन सुबह जल्दी तैयार होकर 11 बजे शांती के घर पहुंच गया। उसने मुझे जल्दी से अंदर बुला लिया और गेट बंद कर दिया। उसने गेट को ताला लगा दिया ताकि कोई अचानक अंदर ना आए जाए।

अंदर जाते ही हम दोनो एक दूसरे पर टूट पड़े। मैंने उसके ओठो को चूमना चालू किया।

उसने भी मुझे चूमना चालू किया। चूमते चूमते हम दोनो ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए। मै उसके सामने चड्डी पर खड़ा था। और वो भी मेरे सामने चड्डी और ब्रा पर खड़ी थी।

उसने नीले रंग कि ब्रा और काले रंग कि चड्डी पहनी हुई थी। मैंने उसे जोर से गले लगा लिया। मेरा लंड चड्डी के ऊपर से ही उसकी चूत को छू रहा था। हम दोनो एक दूसरे के बदन को चूम रहे थे।

एक घंटे तक हम दोनो रोमांस करते रहे। फिर मैंने उसकी ब्रा निकाली। वो शरमा रही थी। मैंने उसके छोटे छोटे बूब्स दबाना चालू किया। फिर मैंने उसकी चूचियां चूसना चालू किया। तब उसने सिसकारियां मारना चालू किया। वो मेरे लंड को चड्डी के ऊपर से मसलने लगी।

फिर मैंने उसकी चड्डी निकाली। उसकी चूत पूरी साफ गुलाबी रंग कि थी। उसको मैंने सोफे पर सुला दिया। मैंने उसको बोला कि क्या मै तुम्हारी चूत कि पप्पी ले सकता हूं। वो बोली अगर तुम्हारी इच्छा होगी तो तुम कुछ भी कर सकते हो।

फिर मैंने उसकी चूत को चाटना चालू किया। उसकी मादक भरी आवाजे निकल रही थी। आह……आह…….आराम से…..आह……

फिर मैंने अपनी चड्डी निकाली। उसने मेरे लंड को देख कर बोला कि  लंड इतना बड़ा होता है। मैंने बोला हां। तो वो बोली कि मेरी चूत में जाने के बाद मुझे कितना दर्द होगा। मैंने बोला फिर तुम इसे चूसकर गीला कर दो। फिर तुम्हे दर्द नहीं होगा। उसने मेरे लंड को चूसना चालू किया।

वो मेरा लंड ठीक ठाक चूस रही थी। मेरा भी पहली बार था इसीलिए मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसके बाद मैंने अपने लंड पर कंडोम लगाया। और उसको सोफे पर सुला दिया।

फिर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रख दिया। और हलके से उसकी चूत में घुसाना चालू किया। उसकी चूत से खून निकलना चालू हुआ। और उसकी जोर से चीख निकल रही थी। मै लंड को अंदर घुसाते घुसाते उसके ऊपर सो गया। और उसे किस करने लगा। मेरा लंड अंदर घुसते ही वो अपनी चूत कि सिकुड़ रही थी।

फिर मैंने धीरे धीरे उसे धक्के मारना चालू किया। उसे बहुत दर्द हो रहा था। मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था। दस मि. कि चुदाई के बाद उसे मजा आने लगा था। फिर मैंने चोदने कि रफ्तार थोड़ी बढ़ा दी। 20 मि. कि चुदाई के बाद मै और वो दोनो ही उसकी चूत में झड़ गए।

दिन भर में मैंने उसको तीन बार चोदा। हमारा पहली बार था इसीलिए मैंने उसको हर बार एक ही तरीके से चोदा। उसके बाद शाम को मै अपने घर चला गया। उसका मैसेज आया तो वो बोली कि मुझे आज बहुत मजा आया। मैंने बोला मुझे भी बहुत मजा आया। मैंने बोला कि अगली बार सेक्स कब करेंगे। वो बोली जल्दी ही।

ऐसे थी मेरे पहले सेक्स कि कहानी।

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