आंटी को पटाया और चोदा

मेरा नाम अखिल है और मैं पटना के एक गाँव का रहने वाला हूँ, मैं अपने लंड के साईज के बारे में बढ़ाई कर टाइम बर्बाद नहीं करूँगा, आप मेरी aunty sex stories से खुद समझ जाइयेगा कि मेरा लंड किसी प्यासी भाभी या औरत को संतुष्ट कर खुश रख सकता है या नहीं।

यह बात उस समय की है जब मुझे सेक्स का कोई खास ज्ञान तो नहीं था पर सेक्स की तरफ पूरा ईच्छा थी। और उस ईच्छा का कारण थी पड़ोस की आंटी जिनके अलग अलग तरीकों से मैं उनकी तरफ आकर्षित होता रहता था।

चलो आंटी के बारे में बता देता हु। आंटी का नाम सुगंधा है जिनकी उम्र अब ३५ वर्ष है और वो आज भी उतनी ही हॉट दिखती हैं जितनी तब दिखती थी जब की मैं यह aunty ki sex story बता रहा हूँ। और उसका कारण है उनको टाइम पर मेरे लंड का साथ मिल जाना।

दरअसल हुआ यूँ कि आंटी के दो बच्चे हो चुके थे दोनों ही नादान उम्र में थे कि तभी आंटी के पति बीमारी के कारण इस दुनिया को छोड़ कर चले गये। गाँवों में पहले ऐसा होता था कि बच्चों और कम उम्र में ही विधवा होने के कारण औरत की शादी उसके देवर से करा दी जाती थी तो आंटी की शादी भी उनके देवर से कर दी गई। फिर सब कुछ यूँ ही चलता रहा। गर्मियों के दिनों में आंटी अपने घर के बाहर चबूतरे पर चारपाई बिछा लेती थी, हम मोहल्ले के सभी बच्चे वहीं बैठे रहते थे पर पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगता था कि आंटी जानबूझकर मुझसे चिपककर बैठने की कोशिश करती हैं।

मैं उन दिनों गाँव के ही एक स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ता था, मैं तब १८ साल का हो चुका था। तो जब खाने की छुट्टी होती थीं तो हम दीवार कूदकर घर आ जाया करते थे। उस आंटी का देवर जो अब उनका पति था वो किराने की दुकान चलाता था पर दिन में खेत पर जाया करता था। मैं यह अच्छी तरह से जानता था इसलिये मैं जानबूझकर उनके घर पर अखबार पढ़ने के बहाने गया। आंटी उस समय नहाने के लिये जाने वाली थी। तो वो अखबार देकर नहाने के लिये चली गई और बाथरूम से मुझसे बातें करती रहीं।

थोड़ी देर बाद उन्होने मुझे आवाज लगाकर कहा- अखिल, अंदर बेड पर कपड़े रह गये हैं, जरा पकड़ा देना?

मैं मन ही मन खुश होता हुआ बोला कि अभी लाया आंटी।

मैं अंदर गया तो देखा आंटी अपना पेटिकोट और ब्रा वहीं छोड़ गई थी। मैं दोनों कपड़े उठाकर बाथरूम की ओर चला गया।

मैं जैसे ही हाथ को आगे करके कपड़े देने लगा मेरा हाथ वहाँ तक नहीं पहुँच रहा था तो आंटी बोली की इधर आकर दे दे, शर्मा क्यों रहा है।

जैसे ही मैं आगे बढ़ा, आंटी को देखकर दंग रह गया। आंटी मेरे सामने सिर्फ चड्डी में खड़ी थी। मै आंटी को एकटक निहारता रहा, आंटी ने जब कपड़े पकड़कर हँसते हुए मुझसे कपड़े माँगे तो मेरी नजर टूटी।

आंटी हँसकर बोली जा अखबार पढ़ ले अब।

मैं वापस आकर बैठकर अखबार पढ़ने लगा।

ऐसे ही दिन गुजरते रहे, रात को देर देर तक मै आंटी के पास बैठा रहता था। कभी आंटी मुझसे चिपककर बैठ जाती तो कभी मैं आंटी से चिपककर बैठ जाता था।

फिर एक साल बाद यह सर्दियों की बात थी, मैं अब कॉलेज में आ चुका था और शहर में पढ़ने लगा था जिस कारण मेरा दिमाग सेक्स के कामों में पहले से ज्यादा दौड़ने लगा था।

रात का वक्त था, आंटी अंदर पलंग पर लेटी हुई थी। मैं भी रोजाना की तरह रात को उनके घर पहुँचा और जाकर उनके पलंग पर बैठ गया। पास में ही उनका छोटा बेटा सोया हुआ था। हम इधर उधर की बातें कर रहे थे। तभी आंटी का बेटा रोने लगा तो उन्होंने उसे चुप कराने के लिये अपने चूचे को बाहर निकाला। और अपने बेटे के मुँह में दे दिया और दूध पिलाने लगी। हालांकि वो इतना छोटा नहीं था कि वो माँ का दूध पिए। थोड़ी देर बाद बात करते करते आंटी ने दूसरे चूचे को भी बाहर निकाल लिया। यह देख मेरे होश उड़ गये। मेरा लंड खड़ा हो गया।

क्योंकि उस समय सिर्फ दिया जला हुआ था तो इतना अच्छा दिखाई नहीं दे रहा था इसलिये मैंने जानबूझकर आंटी के बूब्स को हाथ लगाया और पूछा कि आंटी ये क्या है?

हाथ लगाते ही मैंने हाथ को पीछे हटा लिया।

आंटी बोली बदमाश! तू सब जानता है।

और हँसकर बूब्स को अंदर कर लिया।

मेरी हिम्मत अब पहले से ज्यादा बढ़ गई थी।

अगले दिन मैंने प्लान बनाया कि आंटी को किसी तरीके से अपना लंड दिखाया जाये जिससे आंटी उसके बारे में कुछ बात करें और उसके सपने देखने लगे। मैं तब ही आंटी को बोल दूँ कि आप मुझे बहुत पसंद हो।

जब आंटी छत पर कपड़े सुखाने के लिये आती थी तो उनकी छत से हमारे घर के मेरे कमरे के अंदर का मेरी खिड़की में से दिखाई देता था। मैंने सोचा आंटी को मुठ मारते हुए अपना लंड दिखाता हूँ। क्या पता आंटी को मेरा लंड पसंद आ जाए।

मैं अगले दिन उनके आने से पहले ही कमरे में चला गया और कमरे को अंदर से बंद कर लिया। अब मैं आंटी का कपड़े सुखाने के लिये आने की राह देखने लगा। थोड़ी देर में आंटी कपड़े सुखाने के लिये आ गई। जैसे ही आंटी छत पर आई, मैं अपना लंड निकाल कर खिड़की के सामने खड़ा होकर मुठ मारने लगा।

सब कपड़े सुखाने के बाद आंटी जब नीचे जाने लगी तो उनकी नजर मेरी खिड़की पर पड़ी। मैं तिरछी नजरों से उन्हें देख रहा था। पर मैंने आंटी को पता नहीं लगने दिया की मै उन्हें देख रहा हु। आंटी ने थोड़ी देर देखते रहने के बाद जानबूझकर जोर से खाँसा जिससे मेरी नजर उन पर पड़े।

मैंने आंटी की तरफ देखा और झटके से पीछे की तरफ हो गया। मेरा दिल बहुत तेज तेज धड़कने लगा था। थोड़ी देर इंतजार करके मैं जैसे ही आगे की तरफ हुआ तो तभी आंटी बिना किसी हाव भाव के सिर्फ देखकर चली गई। मै डर गया था, कि कहीं आंटी मेरे घर पर ना बोल दें।

मैं थोड़ी देर बाद घर से बाहर निकला और उनके घर के दरवाजे के सामने आँख मलता हुआ घूमने लगा जिससे लगे कि मै अभी सोकर आया हूँ।

तभी आंटी मुझे देखकर घर से बाहर आ गई और हँसते हुए बोली की शायद सोकर आया है तू?

मैं भी हँसकर मन ही मन खुश होता हुआ हा बोलकर चला गया।

अब मेरी हिम्मत पहले से भी ज्यादा बढ़ गई थी।

अगले दिन मैं आंटी के घर पहुँचा। तब आंटी टीवी देख रही थी, मैं भी आंटी के साथ बाजू में बैठकर टीवी देखने लगा। तभी टीवी में सैनिटरी पैड्स का ऐड आया तो मैंने जानबूझकर आंटी से पूछा कि आंटी, ये क्या होता है?

आंटी हँसकर बोली की ये तेरे मतलब की चीज नहीं है।

मैं आंटी से बताने की जिद करने लगा। लेकिन  वो बताने को तैयार ही नहीं थी बल्कि मुझे डाँट दिया। मुझे अच्छा नहीं लग रहा था तो मैं उठकर जाने लगा।

तभी आंटी ने गुस्से वाली आवाज में ही बुलाया रुक जा सुन। उस समय मेरी हवा टाईट हो रही थी। तभी आंटी बोली की देख बता दूँगी! पर वादा कर तू किसी को बतायेगा नहीं?

मैं यही तो चाहता था, मैं खुश होकर बोला वादा आंटी। मै किसी को नहीं बताऊँगा।

आंटी बोली ठीक है, तो दरवाजा बंद करके आ, मैं बताती हूँ।

मैं बहुत ही तेजी से दरवाजा बंद करके वापस आ गया और दरवाजा बंद किये बराबर, आंटी इतने में एक पैड लेकर आ गई थी।

आंटी बोली तू बैठ जा, आराम से। जो बोलूँगी वो करते रहना। मैं वहीं पलंग पर बैठ गया और आंटी मेरे पास आकर खड़ी हो गई।

आंटी ने अपनी साड़ी और पेटीकोट उठाया और मुझे पकड़ने के लिये बोला, मैंने उसे एकदम से पकड़ लिया। आंटी ने अपनी पैंटी को नीचे सरकाया और पैड को अपनी चूत पर लगाने लगी। आंटी ने पैड लगाते हुए कहा की एक हाथ छोड़कर पैड को एक बार ठीक से कर। मुझे साड़ी की वजह से कुछ दिखाई नहीं दे रहा।

मैं मन ही मन बहुत खुश था क्योंकि जो मैं चाहता था वही हो रहा था। मैंने एक हाथ से साड़ी को छोड़कर उनके पैड को पकड़ा और जानबूझकर अपनी बड़ी वाली उंगली को उनकी चूत पर कसके दबाया।

आंटी ने मेरे ये करते ही बहुत तेज ‘सस्स स्सस…’ करते हुए सिसकारी ली। आंटी की चूत पर गीला गीला सा लगा हुआ था। मैं समझ गया था कि आंटी गर्म हो चुकी है।

फिर मैंने सैनिटरी पैड्स को नीचे छोड़ दिया। और उनकी चूत में अपनी बड़ी उंगली डाल दी। वो आंख बंद करके उसका मजा ले रही थी। फिर मेरी हिम्मत और ज्यादा बढ़ गई। मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने बड़े लंड पर रख दिया। मै जैसे ही ऊंगली को अंदर बाहर करता। तब तब वो मेरे लंड को अच्छे से मसलती।

कुछ देर बाद मैंने आंटी को मेरे बाजू में बैठा लिया। और आंटी की आंखो में देखने लगा। आंटी की आंखो में भी antarvasna आ चुकी थी। फिर हम दोनो के होंठ मिलने मै ज्यादा समय नहीं लगा। हम दोनो एक दूसरे चूमने लगे।

फिर मैंने चूमते चूमते उनकी साड़ी उतारना चालू कर दिया वो भी मेरे शर्ट के अंदर हाथ डालने लगी। कुछ समय में ही मैंने उन्हें मेरे सामने ब्रा और चड्डी पर कर दिया। मै भी उनके सामने चड्डी खड़ा पर हो गया। 

फिर मैंने अपनी चड्डी उतार दी। उन्होंने शरमाते हुए मेरे लंड को हाथ में ले लिया। मैंने उनसे कहा कि क्या आप मेरे लंड को अपने होटों का स्वाद दिखाओगी। उन्होंने कुछ ना बोलते हुए मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया। 

उनकी लंड चुसाई मुझे बहुत पसंद आ रही थी। 10 मिनट तक वो मेरे लंड को गीला करती रही। तब तक मैंने उनकी ब्रा उतार ली थी। फिर मैंने उनको पलंग पर लेटा दिया। और उनकी चड्डी उतार दी।

फिर मै उनके होटों से चूमते चूमते नीचे उनकी चूत तक आया। और उनकी चूत को चूसने लगा। उनकी मादक भरी आवाजे निकल रही थी। आह….आह…..आह….

मै 15 मिनट तक मै उनकी चूत चूस रहा था।

फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रख दिया। उनकी आंखे बंद थी। और अपना लंड एक झटके में ही अंदर घुसा दिया। लंड अंदर जाते ही वो कमर से ऊपर उठ गई। फिर मैंने शुरवात से ही ज़ोर ज़ोर से झटके मारना चालू कर दिया। 

मै अपने लंड को उनकी चूत के अंदर बाहर करते हुए देख रहा था। उनकी हल्की सी मादक भरी आवाजे चल ही रही थी।  मै उनको 25 मिनट तक जोर जोर से बिना रुके चोदता रहा। इतने समय में वो दो बार झड़ चुकी थी। फिर मै भी उनकी चूत के बाहर लंड निकाल कर झड़ गया। और उनके ऊपर ही सो गया। फिर वो मुझे चूमने लगी।

10 मिनट बाद हमने हमारे कपड़े पहन लिए। मैंने आंटी को बोला कि की आप मुझे खुश नहीं लग रही हो। तो वो बोली की ऐसी कोई बात नहीं सिर्फ आज तुमने मुझे मेरे पहले पति की याद दिला दी। शुक्रिया!

मै खुश था क्यूंकि वो भी बहुत खुश थी।

ऐसे मैंने आंटी को पटाकर चोदा।

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