किशोरजी से जुदाई का डर है मुझे

मेरा नाम नंदा है। मेरी उमर 20 साल है। मेरा एक दोस्त है जो मुझसे काफी बड़ा है। उनकी उमर लगभग 40 साल है। उनका नाम किशोर है। उनके मन में मेरे लिए Aunty Antarvasna नहीं है। लेकिन मेरे मन में उनके लिए वासना भरी हुई है।

हमारी दोस्ती अन्तर्वासना पर ही हुई है। वो सिर्फ मुझे अपना दोस्त समझते है। हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे। वो मुझे रोज कॉलेज छोड़ने जाते थे। एक दिन ऐसे ही वो मुझे अपनी बाइक पर कॉलेज छोड़ने जा रहे थे।

तभी किशोर जी ने स्पीड ब्रेकर के पहले अपनी गाड़ी को धीमा किया और ब्रेकर को पार करते वक्त इस तरह ब्रेक लगाया की मै आगे झुक गई और मेरे बूब्स उनकी पीठ से टकरा गए। लेकिन उनके मन में दूसरा कुछ विचार नहीं था। दूसरा कोई लड़का होता तो मौका देखकर चौका मार देता। सिर्फ वो मेरे मस्त बड़े बड़े नर्म नाजुक बूब्स का अपनी पीठ पर रगड़ ने का आनंद ले रहे थे। पर ये किशोर जी हैं। मुझसे उम्र में काफी बड़े हैं। मैं बीस की हूँ और वो चालीस के हैं। एकदम जेंटलमेन।

मैं उनकी दोस्त बन गई हूँ। अन्तर्वासना ने हमको मिलाया। मेरी कहानी पढ़कर उन्होंने मुझे ई-मेल किया। अपनी और अपनी पत्नी कृतिका की तस्वीरें भी भेजीं। मेरे कहने पर भी उन्होंने कभी चूत, लंड या चुदाई की बात नहीं की। मैं उन्हें डार्लिंग बुलाती थी। Aunty Antarvasna

कॉलेज के गेट पर गाड़ी रुकते ही मैं उतर गई। मैंने नीले रंग की एकदम टाइट जींस और काले रंग का टॉप पहना हुआ था। टॉप स्लीवलेस था। मेरे कूदते ही मेरे दोनों बूब्स भी कूद पड़ते थे। जब मैं चलती हूँ तो लोग इस दुविधा में पड़ जाते हैं कि मुझे आगे से देखे या फिर पीछे से। आगे संतरे की तरह गोल गोल बूब्स और पीछे तरबूज की तरह फैली हुई और उठी हुई गांड।

दोनों नजारे मन की वासना बढ़ाने वाले। Aunty Antarvasna

पता है, कोई कोई मेरे इतने दीवाने है की, मेरा पीछा करते हुये बहुत तेजी से आगे चले जाते है। और आगे जाकर खड़ा होकर मुझे आते हुये मेरे बूब्स को अपनी आंखो में वासना लगाकर देखते है। और फिर मै आगे जाने के बाद मेरी गांड को घूरते है।

स्त्री के ये दो अंग ऐसे हैं जो मर्दों को दीवाना बनाते हैं। अगर ये न होते तो कल्पना कीजिये!

आगे पीछे सपाट होता तो स्त्री इतनी आकर्षक नहीं होती। और कोई भी मर्द उसे सुख नहीं दे पाता। आप यही ले लीजिए ना जो लडकी जीरो फिगर वाली होती है, उसे कोई अपनी गर्लफ्रेंड नहीं बनाता।

कामसूत्र में वात्स्यायन ने स्त्री के कितने रूपों का मनमोहक वर्णन किया है। मुझे स्त्री का गदगद रूप पसंद है। थोड़ा भरा हुआ शरीर और मस्त उभार। ऊपरवाले का शुक्रिया कि उन्होंने मुझे बनाते हुये किसी तरह की कंजूसी नहीं की। खूब गोरा रंग दिया, लाल से भरे होंठ दिये, सुनहरे बालों वाली प्यारी चूत दी। इतनी प्यारी है मेरी चूत कि मैं स्नान के बाद आइने के सामने खड़ी होकर उसको देखती रहती हूँ। खुद की चूत पर खुद ही मोहित होकर कहती हूँ की मुझे बनाने वाले!! तुम सच में पुरस्कार के हकदार हो।

क्या आप भी!  खो गए मेरी जवानी में। जरा वापस कहानी पर आइए।

किशोर जी ने कहा कि सुनो रानी, अपना खयाल रखना।

मैंने कहा जी, रखती तो हूँ मै अपना खयाल देखो न कितनी हरि भरी लग रही हूँ।

मैं सेक्स स्टोरी की लेखिका हू। किशोर जी और मैं खुलकर बातें करते हैं। सेक्स की भी बाते होती है। मगर उन्होंने कभी लोभता नहीं दिखाई। सदा मुझे समझाते हैं और कहते हैं कि पहले पढ़ाई कर लो। डॉक्टर क्लियर कर लो। फिर लिखना कहानी। Aunty Antarvasna

मैं उन्हें कहती हूँ की किशोर जी, सेक्स जीवन का अनिवार्य भाग है। सेक्स दुनिया बहुत ही प्रतिष्ठित साइट है। कहानी के बाद मुझे जो ई-मेल और मेसेजेस मिलते हैं, उनसे मुझे लोगों को और दुनिया को समझने का मौका मिलता है। मैं उन्हें ई-मेल भी करती हूँ। मुझे जो लंड और चूत के फोटो प्राप्त होते हैं, वो भी उन्हें दिखाती हूँ।

तो वो मज़ाक में बोलते हैं- रानी, तुम्हारे लिए कितने लोग रोज नंगे होकर अपने ही लंड की फोटो ले रहे हैं।

मैं पहले हँसती और फिर गंभीर हो जाती हु। और कहती हु की किशोर जी! ये वो लोग हैं जो यह चाहते हैं कि उनकी शादी ऐसी लड़की से हो जो सील पैक हो और ये खुद अपने लंड हाथ में लेकर किसी को भी चोदने के लिए तैयार खड़े हैं। किसी भी उम्र से लेकर अस्सी साल की बूढ़ी औरतें भी इनसे बच नहीं पाती हैं। इंसान में इतनी वैशीपन कैसे आ गया किशोर जी!

किशोर जी बेचारे क्या कहते। जो सत्य है उसे गलत कैसे बताते।

मैं किशोर जी का इशारा समझ गई। वो चाहते हैं कि मैं ड्रेस खरीदते वक्त ध्यान रखूँ।

मगर मैं एक महानगर के बहुत बड़े कॉलेज में पढ़ती हूँ। इस गर्ल्स कॉलेज की लड़कियों को तो छोड़ो, यहाँ की प्रोफेसर महिलाएं भी पूरी पटाखा बनकर आती हैं। खूब मेकअप, भड़कीले और छोटे छोटे कपड़े। 

वहाँ मैं गांव की बहिन जी बनकर तो नहीं आ सकती हूँ ना!

जैसा देश वैसा भेष तो जरूरी है।

पर किशोर जी की इसी तरह की बातों से उनके प्रति मेरा सम्मान का भाव बढ़ जाता।

क्लास के बाद मैं केंटीन गई तो वहाँ मेरी चांडाल चौकड़ी वाली फ्रेंड्स बैठी थीं। मैं जैसे ही कुर्सी पर बैठी, वैसे ही तेजी से खड़ी हो गई। सबकी सब हंस पड़ीं। सुशीला ने अपनी मुट्ठी कुर्सी पर रखी हुई थी और अंगूठा ऊपर किया हुआ था वो सीधे मेरे गांड के छेद पर लगा।

मैंने बोले ले खोल देती हूँ पैन्ट और चड्डी, कर ले अपनी हसरत पूरी। जब देखो तब मेरी गांड के पीछे पड़ी रहती हो तुम मुट्ल्ली।

सुशीला बोली हाय सच ! खोल न !! चल मेरे हॉस्टल पर … लेसबियन सेक्स करेंगे।

कविता बोली अरे नंदा!! जा ना इसके साथ!! बिल्कुल लड़कों की तरह चूत चूसती है ये … और बूब्स को तो पूरा निचोड़ डालती है।

सुनैना बोली यार! अब तो रहा नहीं जाता। मेरे बेबी को कोई बाबा चाहिए। वह अपनी चूत को बेबी और लंड को बाबा बोलती है। Aunty Antarvasna

हाँ जी … लड़कियां भी जब अकेली होती हैं तो ऐसी ही बातें करती हैं। जो बालिकाएँ आपके सामने सीधेपन का साक्षात अवतार दिखाई देती हैं ना … वो वैसी होती नहीं हैं। कई बार उनकी बातें लड़कों से भी ज्यादा अश्लील होती हैं।

हमारी बातें भी जमीन छोड़ रही थीं। हम सभी गर्म हो गईं। केंटीन के उस कोने में मौका देखकर एक दूसरे के बूब्स को दबा देतीं और सिसकारी से अपने आनंद और प्यास को दर्शा देती।

सभी को लंड लेना था … मगर किसका लें? बदनामी का डर था।

रजनी ने सभी की समस्या का हल करते हुये कहा कि मैं एक जिगोलो को जानती हूँ, एकदम मस्त माल है। चलो गार्डन में, मैं दिखाती हूँ उसकी पिक।

हम सभी बेताब थीं, सबकी चूतें गीली हो चुकी थीं और निप्पल्स तन चुके थे। सब की सब तुरंत उठ गईं।

मेरे गांड की दीवानी सुशीला ने मेरे कूल्हों पर हाथ रखा और चलने लगी। आज मुझे उसका स्पर्श बहुत अच्छा लगा। सच ही कहा गया कि जब भूख बहुत लगती है तो हर खाने की चीज स्वादिष्ट लगती है।

उद्यान में झाड़ियों के पीछे हम सभी इस तरह बैठ गई कि कोई सामने से आए तो हमें दिख सके। हम चारों की मनोदशा इस तरह की हो गई थी कि अगर वहाँ कोई आकर हमें अपना लंड दिखाता तो हम सभी तुरंत नंगी हो जाती, आँखें बंद करके अपनी अपनी चूत खोल देतीं।

शरीर से पहले कोई भी कार्य मन करता है। शरीर तो बेचारा मन का गुलाम है, वह मन के आदेशों का अनुसरण करता है और अभी हम चारों का मन कह रहा था कि लंड चाहिये।

रेखा ने अपनी बिग स्क्रीन वाले स्मार्ट फोन में व्हाट्सएप पर एक फोटो दिखाते हुये कहा कि इसका नाम राहुल है। छह फीट दो इंच इसकी हाइट है। बॉडी बिल्डर है।

सुशीला बोली इसके हथियार की साइज़ कितना है?

कविता बोली आठ इंच, देखना है क्या?

हम सभी- हाँ ना … दिखा जल्दी।

वो बोली ठीक है। मै तुम लोगो को इसका लंड दिखाऊंगी लेकिन मेरे फ्लैट पर जाने के बाद।

वहा सब अपने अपने बॉयफ्रेंड को फोन करके बुला लो। मेरा तो कोई बॉयफ्रेंड नहीं था। इसीलिए मैंने किशोर जी को बुला लिया। उनसे मैंने कहा की मुझे मेरे प्रोजेक्ट में कुछ आपकी मदत चाहिए। 

हम सब फ्लैट पर पहुंच गए। रेखा ने हमे बड़े लंड की फोटो दिखाई। हम सब वहा नंगी हो गई। हम सब एक दूसरे कि चूत चाटने लगी। और मेरे गांड़ की दीवानी सुशीला मेरी गांड चाटने लगी। Aunty Antarvasna

हमारा लेस्बियन सेक्स आधे घंटे तक चला। फिर वहा एक एक कर के सब के बॉय फ्रेंड आने लगे। पहले रेखा का आया और वो उसे एक कोने में ले कर गया। फिर कविता का आया और वो भी उसे एक कोने में ले कर गया। ऐसे कर के सब के बॉयफ्रेंड कोने में चले गए। मै अकेली किशोर जी की राह देखने लगी। और उनकी याद में खुद ही अपनी चूत में उंगलियां डालने लगी।

फिर किशोर जी आए। मैंने नंगी होकर ही उनके लिए दरवाजा खोला। वो बोले कि यह क्या है नंदा। मैंने उनको पहले अंदर खींच लिया। और उनके लंड को पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी। और उनको बोला कि आज मुझे वासना चढ़ी हुई है। क्या आप उसे कम कर सकते हो। वो नहीं नहीं बोलते रहे। लेकिन मैंने उनकी पैंट उतार कर उनके लंड को चूसना चालू किया। 

फिर मैंने उनको पूरा नंगा कर दिया और उनके लंड को अच्छे से चूसने लगी। उनके अंदर भी मुझे चोदने की वासना जाग गई। लंड चुसाई के बाद वो खड़े खड़े ही मेरी चूत चूसने लगे। मुझे उनकी चूत चुसाई में बहुत मजा आने लगा।

फिर वो पल आया जिसका मुझे कब से इंतजार था। उन्होंने मुझे दीवार के सहारे झुका दिया। और मेरी एक टांग ऊपर कर ली। और फिर अपना 6.5 इंच का लंड मेरी चूत में डाल दिया। लंड अंदर जाते ही मुझे मजा आने लगा। Aunty Antarvasna

किशोर जी मुझे जोर जोर से चोदने लगे वो मुझे हर अंदाज में चोदने लगे। कभी उठाकर। कभी झुकाकर। कभी लेटाकर। कभी मै उनके ऊपर। कभी वो मेरे ऊपर। उन्होंने मुझे बहुत ज्यादा संतुष्ट किया। करीब करी एक घंटे के सेक्स के बाद हम दोनो ही झड़ गए। उन्होंने अपना वीर्य मेरी गांड पर डाल दिया।

इसी खुशी के लिए मुझे किशोर जी से जुदाई का डर है।

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